Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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Dhadak 2 Review: सिद्धांत चतुर्वेदी के दमदार अभिनय और त्रिप्ती डिमरी की खूबसूरती पर लट्टू हुए फैन्स! जाने क्या है फिल्म में खास

Dhadak 2 Review: शाजिया इकबाल द्वारा निर्देशित 'धड़क 2', तमिल फिल्म 'परियेरुम पेरुमाल' की हिंदी रीमेक है, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में व्याप्त जातिगत भेदभाव की सच्चाई को गहराई से उजागर करती है। फिल्म का नायक नीलेश (सिद्धांत चतुर्वेदी), एक दलित छात्र है जो पहली बार कानून की पढ़ाई के लिए कॉलेज पहुंचता है।
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Dhadak 2 Review: शाजिया इकबाल द्वारा निर्देशित 'धड़क 2', तमिल फिल्म 'परियेरुम पेरुमाल' की हिंदी रीमेक है, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में व्याप्त जातिगत भेदभाव की सच्चाई को गहराई से उजागर करती है। फिल्म का नायक नीलेश (सिद्धांत चतुर्वेदी), एक दलित छात्र है जो पहली बार कानून की पढ़ाई के लिए कॉलेज पहुंचता है। उसके संघर्ष सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं, बल्कि उसका नाम, उसकी भाषा और उसकी पहचान तक को चुनौती दी जाती है। एक दृश्य में जब वह अपने उपनाम को “नीलेश बी.ए.एल.एल.बी.” कहता है, तो वह उपहास का पात्र बन जाता है।


Dhadak 2 Review: फिल्म में मौजूद क्लाईमैक्स में है ऐतिहासिक टच 

फिल्म में रोहित वेमुला की त्रासदी का भी संदर्भ आता है, जो फिल्म को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक गहराई देता है। विद्या (त्रिप्ती डिमरी) के साथ नीलेश का रिश्ता, सामाजिक वर्गों के टकराव को और भी सजीव बनाता है। यह फिल्म हिंदी सिनेमा में दुर्लभ रूप से दिखने वाले कास्ट-विलेन के किरदार को भी प्रस्तुत करती है, जिसे सौरभ सचदेवा ने रहस्यमय अंदाज़ में निभाया है।


फिल्म धड़क से चार गुणा बेहतरीन है फिल्म धड़क 2 

वहीं Dhadak 2 Review में बात अगर फिल्म के शीर्षक की करें तो फिल्म का शीर्षक ‘धड़क 2’ रखना सबसे बड़ा चूक लगता है। वर्ष 2018 की ‘धड़क’ को 'सैराट' की फीकी परछाई माना गया था, जबकि ‘धड़क 2’ उससे कहीं ज्यादा गहरी, प्रासंगिक और तीव्र फिल्म है। यह फिल्म न केवल युवा दर्शकों के लिए एक आंखें खोलने वाली कहानी है, बल्कि हिंदी सिनेमा में जातिगत अन्याय को लेकर एक नई बहस की शुरुआत भी करती है।