Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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Delhi-NCR से चल रहा था अंतरराष्ट्रीय कट्टरपंथ नेटवर्क, नोएडा में अल फलाह जैसी Brainwash फैक्ट्री का खुलासा

Delhi-NCR: ग्रेटर नोएडा में धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय कट्टरपंथ नेटवर्क का बड़ा पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क अल फलाह यूनिवर्सिटी की तरह ही युवाओं का radical mindset तैयार करने में सक्रिय था। कासना क्षेत्र में स्थित प्रिंटिंग यूनिट्स की आड़ में बड़े पैमाने पर जिहादी साहित्य तैयार कर देश-विदेश में भेजा जा रहा था। इसमें तुर्किए से मिलने वाले funding links और विदेशी नागरिकों की आवाजाही ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
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Delhi-NCR: ग्रेटर नोएडा में धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय कट्टरपंथ नेटवर्क का बड़ा पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क अल फलाह यूनिवर्सिटी की तरह ही युवाओं का radical mindset तैयार करने में सक्रिय था। कासना क्षेत्र में स्थित प्रिंटिंग यूनिट्स की आड़ में बड़े पैमाने पर जिहादी साहित्य तैयार कर देश-विदेश में भेजा जा रहा था। इसमें तुर्किए से मिलने वाले funding links और विदेशी नागरिकों की आवाजाही ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।


जांच में सामने आया कि इस्तांबुल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और हकीकत आफसेट एंड पब्लिशर्स के नाम पर छिपकर radical content distribution का नेटवर्क चल रहा था। यहां छपी सामग्री न केवल नोएडा-फरीदाबाद-गाजियाबाद जैसे NCR शहरों में भेजी जा रही थी, बल्कि मुंबई और बरेली तक पहुँच चुकी थी। इतना ही नहीं, export के नाम पर ये उन्मादी किताबें अफ्रीकी देशों—विशेषकर तंजानिया—के बाजारों में भी बेची जा रही थीं। पिछले सात वर्षों में लगभग 2.10 करोड़ रुपये की सामग्री का प्रकाशन और लगभग 27.50 लाख रुपये की किताबों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वितरण किया गया। आरोपी फरहान नबी सिद्दीकी ने इन सौदों पर करीब 19 लाख रुपये का GST भी जमा किया, ताकि यह नेटवर्क वैध दिख सके।


जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने 2019 में इलेक्ट्रॉनिक गुड्स के नाम पर फर्म पंजीकृत कराई, लेकिन इसकी आड़ में धार्मिक उन्माद फैलाने वाली पुस्तकों का illegal publishing शुरू कर दिया। बाद में उसने एयरपोर्ट लॉजिस्टिक्स और पोस्टल सेवाओं के लिए Real Global Express Logistics नाम से दूसरी कंपनी भी खोली, ताकि अपने trade operations को और विस्तारित कर सके। हालांकि इस फर्म से कोई बिक्री नहीं हुई, लेकिन शक्तिवर्धक दवाइयों की बड़ी खरीद इसे संदिग्ध बनाती है। तुर्किए और बांग्लादेश के नागरिकों की फैक्ट्री में नियमित मौजूदगी इस बात का संकेत है कि यह international radicalization module देश-विदेश में सक्रिय रूप से जड़ें जमा चुका था। पुलिस और ATS अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं।

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