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अब निजी स्कूल के शिक्षक भी पाएंगे कैशलेस इलाज, सरकार उठाएगी 400 करोड़ रुपये वार्षिक खर्च
उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है।
- sakshi choudhary
- 02 Feb, 2026
उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब तक केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ाते हुए सरकार ने निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा के अंतर्गत शामिल कर लिया है। इस योजना के तहत बेसिक व माध्यमिक शिक्षा परिषद, मान्यता प्राप्त निजी स्कूल, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक (CWSN), अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की वार्डेन और प्रधानमंत्री पोषण योजना की रसोइया सहित इनके आश्रित परिवार के सदस्य भी लाभान्वित होंगे।
एमएलसी श्रीचंद शर्मा ने इस योजना को शिक्षक हितों में ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि अब किसी शिक्षक को गंभीर बीमारी या दुर्घटना में इलाज के लिए अपनी जमा पूंजी बेचने या कर्ज लेने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत प्रति कार्मिक लगभग 3000 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर करीब 15 लाख लाभार्थियों को कवर किया जाएगा, जिससे सरकार पर कुल 400 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च आएगा। यह कदम न केवल आर्थिक सुरक्षा देगा, बल्कि शिक्षकों के सम्मान और आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगा।
योजना का संचालन State Agency for Comprehensive Health and Integrated Services (SACHIS) के माध्यम से किया जाएगा। इसमें सरकारी और साचीज से संबद्ध निजी अस्पताल दोनों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। भाजपा नेता और शिक्षक संगठनों ने इस कदम की सराहना की और इसे शिक्षा जगत में मील का पत्थर बताया। इस निर्णय से शिक्षा क्षेत्र में सरकारी और निजी दोनों शिक्षकों के बीच समानता बढ़ेगी और शिक्षक समाज को नई ऊर्जा मिलेगी।