Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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नोएडा के 50 साल: चुनौतियों से जूझकर बना आईटी और रियल एस्टेट हब

नोएडा की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, और यह सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा। 1976 में स्थापित यह शहर शुरुआत में पहचान और बुनियादी ढांचे के संकट से जूझ रहा था। यमुना नदी और हिंडन नदी के बीच बसे इस क्षेत्र में जलभराव, सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी थी। उद्यमी यहां आने से हिचकते थे। लेकिन सरकार ने औद्योगिक और आवासीय प्लॉट सस्ती दरों पर देकर निवेश को आकर्षित किया, जिससे धीरे-धीरे विकास की नींव पड़ी।
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नोएडा की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, और यह सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा। 1976 में स्थापित यह शहर शुरुआत में पहचान और बुनियादी ढांचे के संकट से जूझ रहा था। यमुना नदी और हिंडन नदी के बीच बसे इस क्षेत्र में जलभराव, सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी थी। उद्यमी यहां आने से हिचकते थे। लेकिन सरकार ने औद्योगिक और आवासीय प्लॉट सस्ती दरों पर देकर निवेश को आकर्षित किया, जिससे धीरे-धीरे विकास की नींव पड़ी।


1990 और 2000 के दशक में कानून व्यवस्था बड़ी चुनौती बनकर सामने आई। अपराध और गुंडा टैक्स के चलते बड़े निवेशक दूरी बनाए हुए थे। हालांकि 2020 में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद हालात में बड़ा सुधार आया। साथ ही कनेक्टिविटी भी एक बड़ी बाधा थी, जिसे DND Flyway और अन्य पुलों के निर्माण से दूर किया गया। इससे दिल्ली और नोएडा के बीच आवागमन आसान हुआ और शहर का विस्तार तेजी से हुआ।


नोएडा के विकास में जमीन अधिग्रहण विवाद और रियल एस्टेट संकट भी बड़ी रुकावट बने। भट्टा-पारसौल कांड के बाद नई भूमि अधिग्रहण नीति लाई गई, जिससे किसानों को बेहतर मुआवजा मिला। वहीं RERA Act लागू होने से बिल्डरों की जवाबदेही तय हुई और फंसे प्रोजेक्ट्स पूरे होने लगे। भ्रष्टाचार के आरोपों से भी शहर की छवि प्रभावित हुई, लेकिन हाल के वर्षों में पारदर्शिता और सख्त प्रशासनिक कदमों से स्थिति सुधरी है। आज नोएडा देश के प्रमुख आईटी और रियल एस्टेट हब के रूप में उभर चुका है।