Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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नोएडा मजदूर हिंसा के बाद एक्शन में योगी सरकार, विवाद सुलझाने को हाई लेवल कमेटी गठित

नोएडा में हाल ही में वेतन वृद्धि और न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर फैक्टरी कर्मियों के हिंसक प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार सख्त नजर आ रही है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर सरकार ने तत्काल प्रभाव से एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसका उद्देश्य मजदूरों और उद्योगों के बीच बढ़ते विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना है। यह कमेटी गौतम बुद्ध नगर पहुंच चुकी है और प्राथमिकता के आधार पर पूरे मामले की जांच कर जल्द ही अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से औद्योगिक क्षेत्रों में स्थिरता बहाल की जा सकेगी।
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नोएडा में हाल ही में वेतन वृद्धि और न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर फैक्टरी कर्मियों के हिंसक प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार सख्त नजर आ रही है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर सरकार ने तत्काल प्रभाव से एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसका उद्देश्य मजदूरों और उद्योगों के बीच बढ़ते विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना है। यह कमेटी गौतम बुद्ध नगर पहुंच चुकी है और प्राथमिकता के आधार पर पूरे मामले की जांच कर जल्द ही अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से औद्योगिक क्षेत्रों में स्थिरता बहाल की जा सकेगी।


इस हाई लेवल कमेटी की कमान औद्योगिक विकास आयुक्त को सौंपी गई है, जबकि अपर मुख्य सचिव (एमएसएमई) और प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन को भी इसमें शामिल किया गया है। खास बात यह है कि समिति में श्रमिक संगठनों के पांच और उद्योग संगठनों के तीन प्रतिनिधियों को भी जगह दी गई है, ताकि सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। सरकार का फोकस संवाद और आपसी सहमति के जरिए समाधान निकालने पर है, जिससे भविष्य में ऐसी हिंसक घटनाओं को रोका जा सके और औद्योगिक माहौल बेहतर बनाया जा सके।


मजदूरों की मुख्य मांग हरियाणा के बराबर न्यूनतम वेतन लागू करने की है। वे अकुशल श्रमिकों के लिए ₹15,220, अर्ध-कुशल के लिए ₹16,780, कुशल के लिए ₹18,500 और उच्च कुशल के लिए ₹19,425 मासिक वेतन की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा वेतन में समानता, समय पर भुगतान, ओवरटाइम का उचित भुगतान, महीने में चार छुट्टियां और बिना कारण नौकरी से न निकालने की मांग भी शामिल है। बढ़ती महंगाई और वेतन असमानता को लेकर मजदूरों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया, जिसे नियंत्रित करने के लिए सरकार अब सख्त और सक्रिय दोनों भूमिका में दिख रही है।

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