Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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ग्रेटर नोएडा में राष्ट्रीय लोक अदालत का रिकॉर्ड: 10.70 लाख मामलों का निस्तारण, 937 करोड़ से अधिक का समझौता

राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत ग्रेटर नोएडा के जनपद न्यायालय परिसर में शनिवार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। इस बार लोक अदालत में अब तक का सबसे बड़ा निस्तारण रिकॉर्ड देखने को मिला, जहां कुल 10.70 लाख मामलों का सफल समाधान किया गया। इनमें न्यायालय स्तर पर 3.03 लाख मामले और प्री-लिटिगेशन स्तर पर 7.66 लाख मामलों का निपटारा किया गया। इस दौरान विभिन्न श्रेणियों में कुल 937.71 करोड़ रुपये से अधिक की समझौता धनराशि तय की गई, जिससे लाखों लोगों को त्वरित न्याय और आर्थिक राहत मिली।
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राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत ग्रेटर नोएडा के जनपद न्यायालय परिसर में शनिवार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। इस बार लोक अदालत में अब तक का सबसे बड़ा निस्तारण रिकॉर्ड देखने को मिला, जहां कुल 10.70 लाख मामलों का सफल समाधान किया गया। इनमें न्यायालय स्तर पर 3.03 लाख मामले और प्री-लिटिगेशन स्तर पर 7.66 लाख मामलों का निपटारा किया गया। इस दौरान विभिन्न श्रेणियों में कुल 937.71 करोड़ रुपये से अधिक की समझौता धनराशि तय की गई, जिससे लाखों लोगों को त्वरित न्याय और आर्थिक राहत मिली।


जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शिवानी रावत के अनुसार, इस लोक अदालत में विभिन्न विभागों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यातायात विभाग ने सबसे अधिक 4.99 लाख मामलों का निस्तारण किया, जबकि पुलिस विभाग ने 13,050 मामलों और चिकित्सा विभाग ने 99,450 मामलों का समाधान किया। वहीं, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय द्वारा 32,500 मामलों का निपटारा किया गया। एनपीसीएल के 45 मामलों में 7.23 लाख रुपये और यूपीपीसीएल के 5,780 मामलों का निस्तारण हुआ। इसके अलावा श्रम न्यायालय ने 1,045 मामलों में 69.23 करोड़ रुपये से अधिक की समझौता राशि तय कराई।


विभिन्न न्यायिक अधिकारियों की अदालतों में भी महत्वपूर्ण फैसले हुए। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में 22 मामलों में 2.30 करोड़ रुपये, वाणिज्य न्यायालयों में 19 मामलों में 1.27 करोड़ रुपये से अधिक की समझौता राशि तय की गई। एनआई एक्ट की अदालत में 310 मामलों में लगभग 2.99 करोड़ रुपये का निपटारा हुआ। साथ ही नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा 6,123 मामलों और राजस्व विभाग द्वारा 1,08,286 मामलों का समाधान किया गया। यह लोक अदालत न केवल न्यायिक व्यवस्था की गति का उदाहरण बनी, बल्कि आम जनता को त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुई।