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E-Rickshaw News: लॉक करने वाले BAT-BMS ऐप से अब खुद बैटरी अनलॉक कर रहे ई-रिक्शा चालक

दिल्ली में ई-रिक्शा चालकों के लिए मुसीबत बन चुका BAT-BMS ऐप अब उनके लिए राहत का जरिया भी बनता जा रहा है। पहले जिस ऐप का इस्तेमाल कुछ शरारती तत्व राह चलते ई-रिक्शा की बैटरी को रिमोटली लॉक करने के लिए कर रहे थे
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दिल्ली में ई-रिक्शा चालकों के लिए मुसीबत बन चुका BAT-BMS ऐप अब उनके लिए राहत का जरिया भी बनता जा रहा है। पहले जिस ऐप का इस्तेमाल कुछ शरारती तत्व राह चलते ई-रिक्शा की बैटरी को रिमोटली लॉक करने के लिए कर रहे थे, अब उसी तकनीक को सीखकर चालक अपनी बैटरी खुद अनलॉक कर रहे हैं। कई ड्राइवरों ने यह ऐप अपने मोबाइल में डाउनलोड कर लिया है और एक-दूसरे को इसका उपयोग भी सिखा रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने ऐसे ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन राजधानी के हजरत निजामुद्दीन, सराय काले खां, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर और गीता कॉलोनी जैसे इलाकों में अब भी कुछ शरारती तत्व इस तकनीक का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। तकनीक की जानकारी न रखने वाले कई बुजुर्ग और नए चालक आज भी इसका शिकार बन रहे हैं।


इस तकनीकी शरारत का सबसे बड़ा असर उन गरीब चालकों पर पड़ा जो रोजाना किराये पर ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। अचानक बैटरी लॉक होने के बाद चालक गाड़ी को धक्का देकर मिस्त्री तक ले जाने को मजबूर हो जाते थे। कई मिस्त्री भी इस मजबूरी का फायदा उठाकर बैटरी अनलॉक करने के नाम पर 200 से 300 रुपये तक वसूल लेते थे, जिससे चालकों की पूरे दिन की कमाई खत्म हो जाती थी। कई पीड़ित चालकों ने बताया कि शुरुआत में उन्हें समझ ही नहीं आया कि ई-रिक्शा अचानक क्यों बंद हो गई। बाद में सोशल मीडिया, साथी चालकों और वाहन मालिकों से जानकारी मिलने पर उन्हें पता चला कि यह सब BAT-BMS ऐप के जरिए किया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने खुद इस तकनीक को समझना शुरू किया और अब जरूरत पड़ने पर अपने मोबाइल से बैटरी अनलॉक कर लेते हैं।


सरकार ने इस तरह के ऐप्स पर रोक लगाने और प्ले स्टोर से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ऐप पर प्रतिबंध लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। जरूरत इस बात की है कि ई-रिक्शा निर्माता कंपनियां बैटरी सुरक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाएं और केवल अधिकृत उपयोगकर्ताओं को ही एक्सेस मिले। साथ ही पुलिस और साइबर एजेंसियों को ऐसे शरारती तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। जागरूकता भी इस समस्या से निपटने का बड़ा हथियार बन रही है। अब चालक न सिर्फ खुद सतर्क हो रहे हैं बल्कि दूसरे साथियों को भी तकनीकी जानकारी देकर इस साइबर शरारत से बचने का तरीका सिखा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि तकनीक का दुरुपयोग रोकने के लिए कानून के साथ-साथ जागरूकता और डिजिटल सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

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