Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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ग्रेटर नोएडा में 16 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन निरस्त, 10 उद्यमियों ने रीस्टोरेशन की मांग की

ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सख्त रुख अपनाते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा नहीं करने और उत्पादन शुरू न करने वाले 16 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन निरस्त कर दिया था।
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ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सख्त रुख अपनाते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा नहीं करने और उत्पादन शुरू न करने वाले 16 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन निरस्त कर दिया था। हालांकि अब इन 16 में से 10 उद्यमियों ने अपने भूखंडों की बहाली (रीस्टोरेशन) के लिए आवेदन किया है। प्राधिकरण का कहना है कि उसका उद्देश्य उद्योगों को बंद करना या भूखंडों का आवंटन रद्द करना नहीं, बल्कि तय समय में उद्योग स्थापित कराकर क्षेत्र में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देना है। इसी कारण रीस्टोरेशन के लिए आए आवेदनों पर सकारात्मक और तथ्यात्मक तरीके से विचार किया जाएगा। अब इन सभी आवेदनों की जांच ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की ओर से गठित समिति करेगी, जो प्रत्येक परियोजना की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।


समिति केवल दस्तावेजों के आधार पर नहीं बल्कि मौके पर जाकर निर्माण कार्य की प्रगति, परियोजना की वर्तमान स्थिति और उत्पादन शुरू होने की संभावनाओं का भी निरीक्षण करेगी। यदि जांच में यह पाया जाता है कि संबंधित उद्यमी गंभीरता के साथ निर्माण कार्य पूरा करने और जल्द से जल्द उत्पादन शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है, तो प्राधिकरण की आवंटन नीति के तहत उसे एक और अवसर दिया जा सकता है। यानी ऐसे मामलों में भूखंड का रीस्टोरेशन संभव है। दूसरी ओर जिन आवंटियों ने अब तक कोई पहल नहीं की है या परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए हैं, उनके खिलाफ आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई यथावत बनी रहेगी। ऐसे भूखंडों को भविष्य में नए निवेशकों और उद्यमियों को आवंटित करने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी, ताकि औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित न हों और क्षेत्र का विकास जारी रहे।


ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक (उद्योग) अरविंद मोहन के अनुसार अब तक 10 उद्यमियों ने रीस्टोरेशन के लिए आवेदन किया है, जिनकी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक मामले ईकोटेक-11 औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े हैं, जहां 50 से अधिक आवंटियों को पहले ही आवंटन निरस्त करने के नोटिस जारी किए जा चुके हैं। प्राधिकरण का मानना है कि औद्योगिक भूखंडों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें। ऐसे में समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि किन उद्यमियों को एक और मौका दिया जाए और किन भूखंडों को नए निवेशकों के लिए उपलब्ध कराया जाए। इससे ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।