Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● वॉलीबॉल चैंपियंस लीग: अयोध्या गर्जन और नम्मा बेंगलुरु स्मैशर्स की शानदार जीत ● क्लासरूम से समुदाय तक बच्चों की सुरक्षा पर शारदा स्कूल ऑफ लॉ ने चलाया जागरूकता अभियान ● एम.एम.एच. कॉलेज में वन्यजीव सप्ताह का समापन, पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता में छात्रों ने दिखाई रचनात्मकता ● गौतमबुद्ध नगर पुलिस में बड़ा फेरबदल, अभय कुमार मिश्र बने ADCP ग्रेटर नोएडा ● जेवर एयरपोर्ट पर यात्रियों का हंगामा, लखनऊ जाने वाली फ्लाइट करीब तीन घंटे लेट ● दिल्ली-NCR में बदलेगा मौसम, 9 अक्तूबर को बारिश और तेज हवाओं का अनुमान ● लखनऊ में गोमती की बाढ़ विकराल, प्लासियो मॉल और इकाना स्टेडियम के सामने भरा पानी ● ग्रेटर नोएडा बस अग्निकांड: किसी का सामान जला तो किसी की जिंदगी भर की जमा-पूंजी ● ग्रेटर नोएडा में पेयजल समस्या पर RWA ने उठाई आवाज, CEO ने दिए स्थायी समाधान के निर्देश ● हमीरपुर के राठ में सपाइयों का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

नोएडा में 83 साल की डॉक्टर 5 दिन रहीं डिजिटल अरेस्ट, एफडी तुड़वाकर साइबर ठगों ने ऐंठे 18.50 लाख रुपये

नोएडा में साइबर ठगों ने एक 83 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला डॉक्टर को अपना शिकार बनाते हुए डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 18.50 लाख रुपये की ठगी कर ली। सेक्टर-30 निवासी महिला डॉक्टर के मुताबिक, 13 जुलाई को उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को एयरटेल हेड ऑफिस का कर्मचारी बताया।
top-news

नोएडा में साइबर ठगों ने एक 83 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला डॉक्टर को अपना शिकार बनाते हुए डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 18.50 लाख रुपये की ठगी कर ली। सेक्टर-30 निवासी महिला डॉक्टर के मुताबिक, 13 जुलाई को उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को एयरटेल हेड ऑफिस का कर्मचारी बताया। उसने दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर बैंक खाता खोला गया है, जिसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जा रहा है। इसके बाद कॉल को एक अन्य व्यक्ति से जोड़ दिया गया, जिसने खुद को महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताते हुए गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। ठगों ने डॉक्टर को पांच दिनों तक लगातार वीडियो कॉल और फोन के जरिए निगरानी में रखा और किसी से भी बात न करने के निर्देश दिए। मानसिक दबाव और सामाजिक प्रतिष्ठा खराब होने के डर से डॉक्टर ने आरोपियों की हर बात पर भरोसा कर लिया।


ठगों ने जांच के नाम पर महिला डॉक्टर से उनके बैंक खाते, एफडी, पोस्ट ऑफिस जमा और अन्य निवेश की पूरी जानकारी हासिल कर ली। अगले ही दिन उन्होंने सेक्टर-30 स्थित इंडियन बैंक शाखा पहुंचकर अपनी एफडी तुड़वाई और 10.50 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए कथित "सुरक्षित खाते" में ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद साइबर अपराधियों का दबाव खत्म नहीं हुआ और 17 जुलाई को उन्होंने डॉक्टर से 8 लाख रुपये एक अन्य बैंक खाते में भी ट्रांसफर करा लिए। इस तरह कुल 18.50 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया। मामले की शिकायत मिलने के बाद नोएडा साइबर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डीसीपी साइबर शैव्या गोयल के अनुसार, आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खाते, मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है ताकि जल्द से जल्द आरोपियों तक पहुंचा जा सके।


साइबर विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, वरिष्ठ नागरिक अक्सर डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर फ्रॉड का आसान निशाना बन जाते हैं क्योंकि उन्हें कानूनी और डिजिटल प्रक्रियाओं की सीमित जानकारी होती है। साइबर ठग पुलिस, सीबीआई, बैंक या टेलीकॉम कंपनियों का नाम लेकर डर और भरोसे का माहौल बनाते हैं तथा लोगों को परिवार या परिचितों से बात करने से रोकते हैं। याद रखें कि भारत में कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को "डिजिटल अरेस्ट" नहीं करती और न ही जांच के नाम पर किसी निजी खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहती है। यदि इस तरह की कोई कॉल आए तो तुरंत कॉल काटें, परिवार को जानकारी दें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। समय रहते सतर्कता ही ऐसे ऑनलाइन फ्रॉड से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।