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ग्रेनो में दिल्ली जैसे कई ‘सत्य निकेतन’! संकरी गलियां और जर्जर इमारतें, सुरक्षा इंतजाम नाकाफी
ग्रेटर नोएडा में दिल्ली के सत्य निकेतन जैसे कई इलाके और इमारतें लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं।
- sakshi choudhary
- 10 Sep, 2026
ग्रेटर नोएडा में दिल्ली के सत्य निकेतन जैसे कई इलाके और इमारतें लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं। संकरी गलियां, बेहद करीब-करीब बनी इमारतें और कई जगहों पर जर्जर भवनों की स्थिति हादसे का खतरा बढ़ा रही है। दिल्ली के सत्य निकेतन में बहुमंजिला हॉस्टल हादसे में सात लोगों की मौत के बाद ग्रेटर नोएडा में भी ऐसे भवनों और पीजी-हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। खासकर उन इलाकों में जहां बड़ी संख्या में छात्र और कामकाजी लोग किराए पर रहते हैं, वहां भवनों की स्थिति और सुरक्षा इंतजामों की जांच जरूरी मानी जा रही है।
ग्रेटर नोएडा के कई घनी आबादी वाले हिस्सों में गलियां इतनी संकरी हैं कि किसी आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड या राहत-बचाव टीम के वाहनों के पहुंचने में परेशानी हो सकती है। वहीं, कुछ इमारतों में पुराने निर्माण, कमजोर ढांचे, अनधिकृत बदलाव और सीमित प्रवेश-निकास जैसी समस्याएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे भवनों में रहने वाले लोगों के लिए आग, शॉर्ट सर्किट, भवन का हिस्सा गिरने या किसी अन्य आपदा की स्थिति में बाहर निकलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि क्या ग्रेटर नोएडा में मौजूद PG, हॉस्टल और किराए की बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था वास्तव में पर्याप्त है।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार ऐसे इलाकों में सिर्फ भवन की बाहरी स्थिति देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि Building Plan, Fire Safety, Emergency Exit, बिजली की वायरिंग, सीढ़ियों, प्रवेश-निकास और भवन के स्वीकृत उपयोग की भी जांच जरूरी है। दिल्ली हादसे के बाद राजधानी में भी जर्जर इमारतों और PG की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। ऐसे में ग्रेटर नोएडा में भी प्राधिकरण और संबंधित विभागों को संवेदनशील इलाकों का व्यापक Safety Audit कराकर खतरनाक भवनों की पहचान करनी चाहिए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले जरूरी कार्रवाई की जा सके।