ग्रेटर नोएडा में 4 फिसदी अतिरिक्त भूखंड के लिए किसानों का आर-पार का आंदोलन, 22 अक्टूबर से प्राधिकरण पर सत्याग्रह
- sakshi choudhary
- 30 Sep, 2026
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से प्रभावित 44 गांवों के किसानों ने शेष 4 प्रतिशत अतिरिक्त आवासीय भूखंड की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। सेक्टर अल्फा वन स्थित प्रेस क्लब ऑफ भारत में प्रेस वार्ता के दौरान किसानों ने कहा कि पिछले करीब एक वर्ष से अलग-अलग माध्यमों से आंदोलन करने के बावजूद उनकी मांग का समाधान नहीं हुआ है। किसानों ने अब किसी एक संगठन के बैनर के बजाय गांव-गांव जाकर लोगों को आंदोलन से जोड़ने का निर्णय लिया है। किसानों के अनुसार, 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती के दिन घंघोला गांव से पैदल मार्च शुरू किया जाएगा। यह मार्च 44 गांवों में पहुंचेगा, जहां किसानों, महिलाओं और युवाओं को आंदोलन के बारे में जानकारी देकर 22 अक्टूबर से शुरू होने वाले सत्याग्रह में शामिल होने के लिए जागरूक किया जाएगा। किसानों ने स्पष्ट किया कि इस बार आंदोलन आश्वासन मिलने पर खत्म नहीं होगा और मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
किसानों ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान उन्होंने भूख हड़ताल, पैदल मार्च और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के गेट पर धरना-प्रदर्शन सहित कई आंदोलन किए हैं। कुछ समय पहले प्राधिकरण तक निकाले गए पैदल मार्च के दौरान किसानों ने अधिकारियों को सितंबर तक मांग पूरी करने का समय दिया था। किसानों का कहना है कि तय समय बीतने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, इसलिए अब 22 अक्टूबर से प्राधिकरण कार्यालय के बाहर सत्याग्रह शुरू किया जाएगा। किसानों के मुताबिक, भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावित किसानों को मुआवजे के साथ 6 प्रतिशत आवासीय भूखंड दिए गए थे। बाद में कुछ किसान अधिक मुआवजे और अतिरिक्त आबादी भूखंड की मांग को लेकर न्यायालय पहुंचे। किसानों का दावा है कि तत्कालीन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रमा रमण ने अन्य किसानों से न्यायालय नहीं जाने की अपील की थी और विकास कार्य प्रभावित होने की बात कही थी।
किसानों का आरोप है कि बाद में न्यायालय जाने वाले किसानों को 10 प्रतिशत आवासीय भूखंड का लाभ मिला, जबकि आश्वासन के आधार पर न्यायालय नहीं जाने वाले किसान अभी भी 6 प्रतिशत भूखंड तक सीमित हैं। इसी अंतर को खत्म करने के लिए किसान शेष 4 प्रतिशत भूखंड की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि आंदोलन के दौरान कई बार प्राधिकरण के अधिकारी मौके पर पहुंचकर मांगों के समाधान का आश्वासन देते रहे, लेकिन लंबे समय बाद भी उन्हें शेष भूखंड नहीं मिले। किसानों ने कहा कि इस बार 44 गांवों के किसान, महिलाएं और युवा मिलकर आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। उनका कहना है कि अब लड़ाई केवल आश्वासन के लिए नहीं, बल्कि समाधान के लिए होगी और शेष 4 प्रतिशत आवासीय भूखंड मिलने तक सत्याग्रह जारी रखा जाएगा।