Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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Greater Noida News: प्रदूषण रोकने के लिए प्राधिकरण की मुहिम तेज, 224 एंटी स्मॉग गन और 107 वाटर टैंकर लगाए

ग्रेटर नोएडा में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अपनी मुहिम तेज कर दी है। शहर में धूल उड़ने से रोकने, सड़कों की सफाई करने और निर्माण स्थलों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
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ग्रेटर नोएडा में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अपनी मुहिम तेज कर दी है। शहर में धूल उड़ने से रोकने, सड़कों की सफाई करने और निर्माण स्थलों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए शहर को 21 जोन में बांटकर अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें तैनात की गई हैं। प्राधिकरण के अनुसार, निर्माण स्थलों पर 216 एंटी स्मॉग गन और सार्वजनिक स्थानों पर 8 एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तरह कुल 224 एंटी स्मॉग गन धूल को नियंत्रित करने के काम में लगाई गई हैं। इसके अलावा, पानी के टैंकरों से सड़कों पर छिड़काव किया जा रहा है और पेड़ों पर जमी धूल भी साफ की जा रही है।


शहर को 21 जोन में बांटकर तैनात की गईं टीमें

वायु प्रदूषण की निगरानी और रोकथाम के लिए प्राधिकरण ने ग्रेटर नोएडा को 21 जोन में बांटा है। प्रत्येक जोन में वरिष्ठ प्रबंधक स्तर के अधिकारी को जोनल अधिकारी और प्रबंधक स्तर के अधिकारी को सहायक जोनल अधिकारी बनाया गया है। इन टीमों को अपने क्षेत्र में धूल, कूड़े और गंदगी पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है। जहां कूड़ा पड़ा मिलेगा, वहां संबंधित एजेंसी या वेंडर को सूचना देकर सफाई कराई जाएगी। टीमें यह भी देखेंगी कि कहीं कूड़ा जलाकर प्रदूषण तो नहीं फैलाया जा रहा है। प्राधिकरण के महाप्रबंधक परियोजना एके सिंह और उप महाप्रबंधक विजय रावल भी शहर का निरीक्षण कर रहे हैं।


224 एंटी स्मॉग गन और 11 मशीनों से होगी सफाई

प्राधिकरण के उप महाप्रबंधक विजय रावल के मुताबिक, निर्माण स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर एंटी स्मॉग गन लगाई गई हैं। इन मशीनों का उद्देश्य हवा में उड़ने वाली धूल को कम करना है। सड़कों की सफाई के लिए 11 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें लगाई गई हैं। ये मशीनें सड़कों पर जमा धूल को साफ करने में मदद करती हैं। इसके साथ ही पानी के टैंकरों से सड़कों पर छिड़काव किया जा रहा है। प्राधिकरण इन गतिविधियों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से शोधित पानी का भी इस्तेमाल कर रहा है। यानी ट्रीटमेंट के बाद साफ किए गए पानी का उपयोग धूल को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है।


GRAP के नियमों के तहत प्रदूषण पर निगरानी

एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के नियम लागू किए जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने संबंधित विभागों को जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। परियोजना विभाग, स्वास्थ्य विभाग, उद्यान विभाग और अन्य संबंधित टीमें इस अभियान में शामिल हैं। प्राधिकरण का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने और सफाई में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।