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यूपी राज्यसभा चुनाव: भाजपा की नौवीं सीट पर नजर, 25 अतिरिक्त वोटों की जरूरत; सपा के बागी विधायकों पर निगाह

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है।
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उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा आठ उम्मीदवारों को जिताने के बाद नौवीं सीट पर भी दांव लगाने की तैयारी में है। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के हिसाब से एक राज्यसभा सीट के लिए 36-37 वोट का गणित सामने आ रहा है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा के पास सहयोगी दलों और कुछ असंबद्ध विधायकों को मिलाकर आठ उम्मीदवारों के लिए जरूरी संख्या से अधिक वोट होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, नौवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। इसी वजह से सपा के उन विधायकों पर नजर होने की चर्चा है, जो पहले पार्टी लाइन से अलग मतदान कर चुके हैं या जिनके भाजपा के साथ राजनीतिक समीकरण बने हैं।


राज्यसभा चुनाव में वोटों के गणित के मुताबिक भाजपा के पास अपने 256 विधायक हैं। इसके अलावा अपना दल (एस), निषाद पार्टी, रालोद और सुभासपा के विधायक भी एनडीए के साथ हैं। हालिया रिपोर्टों में भाजपा के कुल समर्थन को लेकर अलग-अलग गणित सामने आए हैं। अमर उजाला के अनुसार, आठ उम्मीदवारों को जिताने के बाद भाजपा के पास करीब 11 वोट अतिरिक्त बचने का अनुमान है और नौवीं सीट के लिए उसे करीब 25 और वोट जुटाने होंगे। वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया है कि सपा के 25 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर सपा भी अपने तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है और भाजपा के सहयोगी दलों के विधायकों के साथ-साथ अपने पुराने बागी विधायकों को साधने की कोशिश कर रही है।

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित हो चुका है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना होगी। वर्तमान संख्या बल के आधार पर भाजपा और सपा के बीच अतिरिक्त सीटों को लेकर मुकाबला विधायकों के समर्थन पर निर्भर करेगा। सपा के पास 101 विधायक बताए जा रहे हैं, हालांकि उसके कुछ विधायक पार्टी से अलग हो चुके हैं या असंबद्ध घोषित किए गए हैं। सपा ने दो उम्मीदवारों के रूप में प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी के नाम घोषित कर दिए हैं और तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी रणनीति पर काम चल रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों दलों के लिए अपने-अपने विधायकों और सहयोगी दलों को साथ रखना अहम होगा।