Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● यूपी के भाजपा विधायक पर गंभीर आरोप, युवकों को उल्टा लटकाकर पीटने और करंट लगाने का दावा ● ग्रेटर नोएडा में सेफ सिटी परियोजना में देरी, 2700 कैमरे लगाने का इंतजार बढ़ा ● कोहरे में हादसे रोकने की तैयारी, ग्रेनो वेस्ट-130 मीटर रोड पर लग रहे रोड ब्लिंकर्स ● ग्रेनो में अवैध डंपिंग पर प्राधिकरण सख्त, एम्स गोल्ड होम पर 40,400 रुपये का जुर्माना ● पांच विद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच होगा जूनियर चैंपियनशिप स्पोर्ट्स कार्निवल 2026 ● जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलेगा, नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट रखने को योगी कैबिनेट की मंजूरी ● ग्रेटर नोएडा से KGP तक बनेगी सीधी कनेक्टिविटी, 105 मीटर चौड़ी सड़क का होगा विस्तार ● वॉलीबॉल चैंपियंस लीग: अयोध्या गर्जन और नम्मा बेंगलुरु स्मैशर्स की शानदार जीत ● क्लासरूम से समुदाय तक बच्चों की सुरक्षा पर शारदा स्कूल ऑफ लॉ ने चलाया जागरूकता अभियान ● एम.एम.एच. कॉलेज में वन्यजीव सप्ताह का समापन, पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता में छात्रों ने दिखाई रचनात्मकता

राजनीति का संत! राजपाल त्यागी की विरासत, जो जनसेवा की मिसाल बन गई

स्वर्गीय राजपाल त्यागी जी की है। एक ऐसे व्यक्ति, जिन्होने राजनीति को साधन नहीं, सेवा का माध्यम माना। जिनकी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के प्रति समर्पण ने उन्हें राजनीति का संत बना दिया। बागपत जिले के गांव मुकारी की पावन मिट्टी में जन्मे राजपाल त्यागी ने साधारण शुरुआत की, लेकिन सपने असाधारण थे। उन्होंने गाजियाबाद बार एसोसिएशन में सबसे कम उम्र में सचिव और फिर अध्यक्ष बनकर इतिहास रचा।
top-news

“कोई चलता है पदचिह्नों पर…

कोई पदचिह्न बनाता है…
बस वही सूरमा वार पुरुष दुनिया में पूजा जाता है…”

यह पंक्तियाँ किसी कवि की कल्पना नहीं, बल्कि धरती पर जन्मे एक असाधारण व्यक्तित्व की जीवंत झलक स्वर्गीय राजपाल त्यागी जी की है। एक ऐसे व्यक्ति, जिन्होने राजनीति को साधन नहीं, सेवा का माध्यम माना। जिनकी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के प्रति समर्पण ने उन्हें राजनीति का संत बना दिया। बागपत जिले के गांव मुकारी की पावन मिट्टी में जन्मे राजपाल त्यागी ने साधारण शुरुआत की, लेकिन सपने असाधारण थे। उन्होंने गाजियाबाद बार एसोसिएशन में सबसे कम उम्र में सचिव और फिर अध्यक्ष बनकर इतिहास रचा। एक बेहतरीन वकील के रूप में अपनी पहचान बनाने के बावजूद, उनका मन कानून के पन्नों में नहीं, गांव-गांव की गलियों में जनता की सेवा करने में रमा।


राजनीति में प्रवेश और जननायक की पहचान


राजनीति में कदम रखते ही उन्होंने जनसेवा को ही अपना धर्म बना लिया। कांग्रेस के ज़िला अध्यक्ष के रूप में दस वर्षों तक उन्होंने संगठन को मज़बूती दी, वह भी उस दौर में जब यह पद केवल राजनीति का नहीं, बल्कि सम्मान और जवाबदेही का प्रतीक माना जाता था। उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे छह बार विधायक चुने गए, जिनमें से दो बार निर्दलीय जीत हासिल की। यही नहीं, उत्तर प्रदेश सरकार में दो बार राज्यमंत्री और दो बार कैबिनेट मंत्री बने. यह उपलब्धियाँ आज भी गाजियाबाद और आसपास के जिलों के किसी भी नेता के खाते में नहीं हैं।


जब राजनीति में दिखावा और स्वार्थ आम होता गया, राजपाल त्यागी जी ने न सिफारिश को जगह दी, न समझौते को। ना कभी छुट्टियों पर गए, ना विश्राम लिया। उनका जीवन एक तपस्वी की तरह था. सादा जीवन, उच्च विचार। उन्होंने कभी विधायक निधि का निजी लाभ नहीं उठाया, ना ही अपराधियों से मेल-जोल रखा। दिल्ली के नज़दीक रहते हुए भी उन्होंने वहां बड़े नेताओं की परिक्रमा करना उचित नहीं समझा. उनकी राजधानी जनता का विश्वास था, और उनका दरबार मुरादनगर की गलियाँ।


अंतिम यात्रा में उमड़ा भारी जनसैलाब


उनकी अंतिम यात्रा इस बात का प्रमाण थी कि नेता वही होता है, जिसे लोग दिल से चाहें। भारी बारिश, कांवड़ यात्रा और तमाम बाधाओं के बावजूद हजारों लोग उनके अंतिम दर्शन को पहुंचे। देहांत के कई दिनों बाद तक, सुबह 7 बजे से लेकर देर रात तक लोगों का तांता लगा रहा. ये थी एक जननायक की अंतिम विदाई। उनके दिखाए रास्ते पर आज उनके सुपुत्र अजीतपाल त्यागी, दो बार भाजपा से विधायक चुने जा चुके हैं और उसी निष्ठा और समर्पण से जनता की सेवा में लगे हैं। यह दिखाता है कि राजपाल त्यागी जी का सफर अभी खत्म नहीं हुआ है, वह आज भी अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से जीवित हैं।