Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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Uttar Pradesh: नेपाल के पानी से तबाह सीतापुर! सरयू में समाए सैकड़ों घर, मदद के नाम पर बस 20 किलो राशन

Uttar Pradesh: लगातार हो रही बारिश और Nepal से छोड़े गए पानी ने सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील क्षेत्र में तबाही मचा दी है। सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से कई गांव नदी में समा गए हैं। कटान के कारण शुकुलपुरवा के रामरूप पुरवा, लोधन पुरवा, महाजन पुरवा, सुंदर पुरवा और झकटु पुरवा का अस्तित्व संकट में है। भूषणपुरवा और लोधनपुरवा गांव लगभग मिट चुके हैं। अब तक करीब 100 कच्चे घर नदी में विलीन हो गए, लेकिन Flood Relief के नाम पर प्रभावित परिवारों को केवल एक बार 20 किलो राशन (10 किलो आटा व 10 किलो चावल) ही मिला।
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Uttar Pradesh: लगातार हो रही बारिश और Nepal से छोड़े गए पानी ने सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील क्षेत्र में तबाही मचा दी है। सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से कई गांव नदी में समा गए हैं। कटान के कारण शुकुलपुरवा के रामरूप पुरवा, लोधन पुरवा, महाजन पुरवा, सुंदर पुरवा और झकटु पुरवा का अस्तित्व संकट में है। भूषणपुरवा और लोधनपुरवा गांव लगभग मिट चुके हैं। अब तक करीब 100 कच्चे घर नदी में विलीन हो गए, लेकिन Flood Relief के नाम पर प्रभावित परिवारों को केवल एक बार 20 किलो राशन (10 किलो आटा व 10 किलो चावल) ही मिला।


प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआती दिनों में ग्राम प्रधान द्वारा चार दिन तक लंच पैकेट बांटे गए थे, लेकिन अब वह भी बंद हो गया। प्रशासनिक अधिकारी दौरे पर आते हैं, मगर राहत की ठोस व्यवस्था नहीं कर पाए। कटान प्रभावित मीना यादव बताती हैं कि मिली Ration Kit में आटा, चावल, आलू, दाल, तेल और कुछ जरूरी सामान था, जिससे मुश्किल से 15 दिन का गुजारा हुआ। अब परिवारों के सामने पेट पालने की समस्या खड़ी हो गई है।


गांव की अर्चना बताती हैं कि छह लोगों के परिवार के लिए मिली राहत बहुत कम थी। मजबूरी में उनके परिजन रामपुर मथुरा जाकर मजदूरी कर रहे हैं, ताकि चूल्हा जल सके। वहीं, सुखदेई की आंखें नम हो गईं जब उन्होंने कहा “साहब सब तबाह हो गया, खेत और घर दोनों नदी में चले गए। अब छप्पर डालकर रह रहे हैं।” मुनेश्वरी ने भी बताया कि Animal Vaccination का भरोसा दिया गया था, लेकिन कोई देखने तक नहीं आया। गांव के लोग भगवान भरोसे जिंदगी काट रहे हैं।


हर साल सरयू का कटान इन गांवों को उजाड़ता है। तटबंध के भीतर बसे परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर रहते हैं। रोजगार के लिए कई सदस्य दिल्ली, मुंबई और लुधियाना में काम करने जाते हैं। प्रशासन का दावा है कि Disaster Management टीम हर प्रभावित तक राहत पहुंचाएगी और किसी भी लापरवाही पर कार्रवाई होगी। लेकिन ज़मीनी हालात बताते हैं कि परिवारों के सामने आज सबसे बड़ा सवाल है आज का खाना कहां से आएगा?

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