Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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Uttar Pradesh: इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा ‘राष्ट्र के लिए मध्यस्थता’ अभियान में उल्लेखनीय सफलता

Uttar Pradesh: न्याय प्रणाली को अधिक accessible और efficient बनाने की दिशा में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने “Rashtra Ke Liye Madhyasthata” अभियान में सराहनीय भूमिका निभाई है। National Legal Services Authority (NALSA) और Supreme Court of India के मार्गदर्शन में चलाया गया यह विशेष Mediation Campaign 01 जुलाई से 30 सितंबर 2025 तक चला। इस 90-दिवसीय अभियान का उद्देश्य लंबित मामलों का speedy disposal सुनिश्चित करना और न्याय को जनता के और करीब लाना था।
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Uttar Pradesh: न्याय प्रणाली को अधिक accessible और efficient बनाने की दिशा में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने “Rashtra Ke Liye Madhyasthata” अभियान में सराहनीय भूमिका निभाई है। National Legal Services Authority (NALSA) और Supreme Court of India के मार्गदर्शन में चलाया गया यह विशेष Mediation Campaign 01 जुलाई से 30 सितंबर 2025 तक चला। इस 90-दिवसीय अभियान का उद्देश्य लंबित मामलों का speedy disposal सुनिश्चित करना और न्याय को जनता के और करीब लाना था।


अभियान के तहत इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने Alternative Dispute Resolution (ADR) तंत्र को सशक्त बनाने के लिए कई ठोस कदम उठाए। उच्च न्यायालय और उसकी लखनऊ पीठ में 1,978 मामलों को मध्यस्थता के लिए भेजा गया, जिनमें से 100 मामलों का सफल समाधान through mediation हुआ। वैवाहिक विवाद, चेक अनादर, वाणिज्यिक विवाद, भूमि अधिग्रहण, ऋण वसूली, सेवा संबंधी मामले और समझौता योग्य आपराधिक मामलों को प्राथमिकता देते हुए निपटारा किया गया। U.P. State Legal Services Authority के सचिव संजय सिंह प्रथम ने बताया कि यह पहल न्यायपालिका पर बढ़ते बोझ को कम करने में मील का पत्थर साबित होगी।


अभियान की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने हेतु District Courts में नियमित वर्चुअल मीटिंग्स आयोजित की गईं, जिनमें District Judges, Family Courts, Commercial Courts, Motor Accident Claims Tribunals और Land Acquisition Authorities के अधिकारी शामिल हुए। उत्तर प्रदेश के जिला न्यायालयों में 1,15,309 मामलों को मध्यस्थता के लिए भेजा गया, जिनमें से 13,250 मामलों का सफल निपटारा हुआ। यह आंकड़ा दर्शाता है कि Mediation Process अब विवाद समाधान का एक सशक्त और भरोसेमंद माध्यम बनता जा रहा है।


अभियान के दौरान जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए Print, Radio और Electronic Media का व्यापक उपयोग किया गया। Posters और Banners के माध्यम से लोगों को मध्यस्थता के फायदे बताए गए। साथ ही, Retired Judicial Officers को उनके जिलों में मध्यस्थ के रूप में नियुक्त किया गया और Additional Advocate Mediators की सेवाएं भी ली गईं। इस nationwide mediation drive की सफलता से न केवल जनता में मध्यस्थता के प्रति विश्वास बढ़ा है, बल्कि न्याय वितरण प्रणाली को भी नई दिशा मिली है। “Rashtra Ke Liye Madhyasthata Abhiyan” ने यह साबित किया है कि speedy justice through ADR अब न्यायपालिका की प्राथमिकता बन चुकी है, जिससे एक inclusive and efficient justice system की दिशा में भारत एक सशक्त कदम बढ़ा रहा है।

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