Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल: 8 साल बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस क्यों छोड़ी?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने करीब 8 साल बाद पार्टी छोड़कर संगठन की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 36 वर्षों से सक्रिय राजनीति में रहे सिद्दीकी का कहना है कि कांग्रेस में उन्हें ज़मीन पर काम करने की आज़ादी ही नहीं दी गई। उनका दावा है कि पार्टी जॉइन करते समय उन्होंने किसी पद की मांग नहीं की थी, सिर्फ़ यह कहा था कि उन्हें जनता के बीच जाकर काम करने दिया जाए। सिद्दीकी के मुताबिक, उन्होंने प्रियंका गांधी से हाथ जोड़कर आग्रह किया था कि अगर काम नहीं मिलेगा तो वे बीमार पड़ जाएंगे, क्योंकि राजनीति उनके लिए भाषण नहीं बल्कि ज़मीनी संघर्ष है।
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने करीब 8 साल बाद पार्टी छोड़कर संगठन की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 36 वर्षों से सक्रिय राजनीति में रहे सिद्दीकी का कहना है कि कांग्रेस में उन्हें ज़मीन पर काम करने की आज़ादी ही नहीं दी गई। उनका दावा है कि पार्टी जॉइन करते समय उन्होंने किसी पद की मांग नहीं की थी, सिर्फ़ यह कहा था कि उन्हें जनता के बीच जाकर काम करने दिया जाए। सिद्दीकी के मुताबिक, उन्होंने प्रियंका गांधी से हाथ जोड़कर आग्रह किया था कि अगर काम नहीं मिलेगा तो वे बीमार पड़ जाएंगे, क्योंकि राजनीति उनके लिए भाषण नहीं बल्कि ज़मीनी संघर्ष है।


नसीमुद्दीन सिद्दीकी बताते हैं कि प्रियंका गांधी ने उनकी बात अपने सलाहकार संदीप सिंह को सौंप दी, लेकिन मामला वहीं अटक गया। उनका आरोप है कि जब उन्होंने पश्चिम यूपी के 14 ज़िलों में ‘संविधान बचाओ संकल्प सभा’ की शुरुआत की तो संदीप सिंह का फोन आया और अभियान बंद करने को कहा गया। बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की कोशिशों पर भी रोक लगाई गई। हर बार यही कहा गया कि “प्रियंका जी ने मना किया है”, लेकिन यह कभी नहीं बताया गया कि मना क्यों किया गया। सिद्दीकी का कहना है कि इस तरह ज़मीन पर काम करने वाले नेताओं को हतोत्साहित किया गया।


दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में राहुल गांधी ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को समर्थन दिया था और ज़मीनी राजनीति के लिए प्रेरित किया था। लेकिन समय के साथ संपर्क टूट गया, संदेशों का जवाब आना बंद हो गया। पांच साल तक घुटन महसूस करने के बाद सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़ने का फैसला किया। उनका साफ कहना है कि वे “घर बैठे जंग” नहीं लड़ सकते। यह सिर्फ़ एक नेता का इस्तीफ़ा नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन की आंतरिक कार्यशैली पर एक बड़ा सवाल है, क्या पार्टी आज भी ज़मीन से जुड़े नेताओं को खुलकर काम करने की आज़ादी दे पा रही है?

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