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यूपी में गर्मी के पहले बढ़ी बिजली की मांग, गैस की कमी बनी कारण

उत्तर प्रदेश में गर्मी का आगमन होते ही बिजली की खपत में तेजी आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 15 दिनों में प्रदेश में बिजली की खपत लगभग 2,000 मेगावाट बढ़ी है। इसकी प्रमुख वजह गैस सिलिंडर की कमी है, जिसके कारण लोग खाना पकाने के लिए इंडक्शन और हीटर जैसे बिजली आधारित उपकरणों पर निर्भर हो रहे हैं। लखनऊ, आगरा, कौशांबी और मथुरा सहित कई जिलों में इस बदलाव का असर देखा जा रहा है।
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उत्तर प्रदेश में गर्मी का आगमन होते ही बिजली की खपत में तेजी आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 15 दिनों में प्रदेश में बिजली की खपत लगभग 2,000 मेगावाट बढ़ी है। इसकी प्रमुख वजह गैस सिलिंडर की कमी है, जिसके कारण लोग खाना पकाने के लिए इंडक्शन और हीटर जैसे बिजली आधारित उपकरणों पर निर्भर हो रहे हैं। लखनऊ, आगरा, कौशांबी और मथुरा सहित कई जिलों में इस बदलाव का असर देखा जा रहा है।


प्रदेश के वरिष्ठ ऊर्जा अधिकारी बताते हैं कि मौसम के अनुसार खपत सामान्यतः 18 से 19 मेगावाट होनी चाहिए थी, लेकिन घरेलू उपभोक्ता अब गैस के बजाय बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में सुबह और शाम आठ से 10 बजे के बीच खपत सबसे अधिक रहती है। लखनऊ के गोमती नगर में इंडक्शन विक्रेताओं का कहना है कि बिक्री पहले 10-20 प्रतिदिन होती थी, जो अब 50 से अधिक हो गई है। इसी तरह इमरसन रोड और अन्य इलाकों में भी बिजली उपकरणों की मांग बढ़ी है।


हालांकि बिजली की कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को पर्याप्त आपूर्ति मिल रही है। यूपी पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल के अनुसार, सभी डिस्कॉम 32,000 मेगावाट से अधिक बिजली की आपूर्ति का लक्ष्य रखकर काम कर रहे हैं। प्रतिदिन की खपत आंकड़ों के अनुसार, मार्च की शुरुआत में 19,229 मेगावाट से लेकर 10 मार्च को 21,678 मेगावाट तक बढ़ी है, जो इस गर्मी से पहले बढ़ी हुई मांग का प्रमाण है।

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