UP Politics: सपा के मुख्य सचेतक पद से कमाल अख्तर का इस्तीफा, रुचि वीरा विवाद के बीच बढ़ीं राजनीतिक अटकलें
- sakshi choudhary
- 30 Jun, 2026
उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुरादाबाद से विधायक कमाल अख्तर ने विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) पद से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब उनकी और मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेदों की चर्चा लगातार सुर्खियों में है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इस्तीफे के कारणों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे सपा के अंदरूनी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। कमाल अख्तर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने हमेशा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के हर आदेश का पालन किया है और आगे भी पार्टी नेतृत्व के हर निर्देश का सम्मान करते रहेंगे। गौरतलब है कि जुलाई 2024 में मनोज कुमार पांडे के मुख्य सचेतक पद छोड़ने के बाद कमाल अख्तर को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके इस्तीफे के बाद अब सपा के संगठनात्मक ढांचे और आगामी रणनीति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
कमाल अख्तर और रुचि वीरा के बीच विवाद की शुरुआत लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान मानी जाती है। दरअसल, कमाल अख्तर मुरादाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे और बताया जाता है कि उन्हें पार्टी का टिकट भी मिल गया था। लेकिन अंतिम समय में सपा नेता आजम खान के हस्तक्षेप के बाद टिकट वापस लेकर रुचि वीरा को उम्मीदवार बनाया गया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी लगातार बढ़ती गई। हाल ही में 14 जून को मुरादाबाद में आयोजित पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) सम्मान सम्मेलन में रुचि वीरा को आमंत्रित नहीं किया गया और कार्यक्रम के पोस्टर में भी उनकी तस्वीर शामिल नहीं थी। इस घटनाक्रम के बाद विवाद खुलकर सामने आ गया। मामला बढ़ने पर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में आपात बैठक बुलाकर दोनों नेताओं सहित कई वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा की थी। माना जा रहा था कि विवाद सुलझ गया है, लेकिन कमाल अख्तर के इस्तीफे ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कमाल अख्तर को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ और भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है। वे अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रह चुके हैं और राज्यसभा सांसद के रूप में भी पार्टी का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ऐसे में उनका मुख्य सचेतक पद छोड़ना केवल एक संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि सपा की अंदरूनी राजनीति में नए संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी जल्द ही इस विवाद पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाती है, तो इसका असर मुरादाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें अखिलेश यादव के अगले फैसले और समाजवादी पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।