राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला: चंपत राय और अनिल मिश्रा हटे, SIT रिपोर्ट में 70 चोरी, ट्रस्ट में क्या बदलेगा?
- sakshi choudhary
- 07 Jul, 2026
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के मामले ने बड़ा प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं, जबकि विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को भी ट्रस्ट से हटा दिया गया है। इन बदलावों के साथ ही ट्रस्ट ने मंदिर प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाया गया है और अब बैंक खातों का संचालन कृष्ण मोहन, जगदीश आफले और चंदन राय संयुक्त रूप से करेंगे। इसके अलावा पहली बार मंदिर के संचालन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए तीन सदस्यीय चयन समिति गठित की गई है, जो योग्य नामों की सिफारिश करेगी। ट्रस्ट ने यह भी तय किया है कि मौजूदा हालात को देखते हुए अगली बैठक 22 जुलाई को होगी, जिसमें नए ट्रस्टियों की नियुक्ति, एसआईटी की प्रगति रिपोर्ट और प्रशासनिक सुधारों पर विस्तार से चर्चा होगी।
राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की एसआईटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दान की गिनती के दौरान लागू सुरक्षा नियमों को कमजोर किया गया, अनिवार्य तलाशी को रैंडम तलाशी में बदल दिया गया और कर्मचारियों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड व निजी सामान पर रोक जैसे नियमों का पालन नहीं कराया गया। एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले नोट चोरी किए जाने की घटनाएं दर्ज होने की बात कही है। जांच में यह भी सामने आया कि केवल 45 दिन का सीसीटीवी बैकअप रखा गया, जबकि 180 दिन तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की सिफारिश थी। रिपोर्ट में रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है, जिसके पास बिना अधिकार मंदिर की कई हुंडियों की चाबियां थीं। आरोप है कि उसने अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव को भी गिनती टीम में शामिल कराया, जिसके बाद कथित चोरी का सिलसिला लगातार चलता रहा।
एसआईटी रिपोर्ट में डॉ. अनिल मिश्रा पर दान प्रबंधन की प्रभावी निगरानी न करने का आरोप लगाया गया है, जबकि गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव के खिलाफ सुरक्षा व्यवस्था लागू न करने और एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई है। पुलिस जांच में कई अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने पूछताछ में दो से तीन करोड़ रुपये तक की कथित चोरी स्वीकार की है, जिनसे अयोध्या और अन्य स्थानों पर संपत्तियां खरीदी गईं। पुलिस अब तक करीब 79 लाख रुपये नकद, एक कार, आभूषण और अन्य संपत्तियां बरामद कर चुकी है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि अब विशेषज्ञों की सलाह और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर दान प्रबंधन की पूरी व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित, तकनीकी रूप से मजबूत तथा पारदर्शी बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *