Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर एक्शन पर रोक, मायावती बोलीं- तोड़फोड़ नहीं समाधान जरूरी

रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लग गई है। मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने यूनिवर्सिटी को अंतरिम राहत देते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अंतिम सुनवाई तक रोक लगाने का आदेश दिया है।
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रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लग गई है। मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने यूनिवर्सिटी को अंतरिम राहत देते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अंतिम सुनवाई तक रोक लगाने का आदेश दिया है। इस फैसले का बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े मामलों में तोड़फोड़ जैसे कठोर कदम उठाने के बजाय नियमों के दायरे में समाधान निकालने की कोशिश होनी चाहिए। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर फैसले को उचित बताया और छात्र हितों को प्राथमिकता देने की अपील की।


मायावती ने कहा कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण के आधार पर जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों को गिराने की कार्रवाई पर रोक लगाना सही कदम है। उन्होंने कहा कि मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित इस यूनिवर्सिटी का मामला केवल निर्माण नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हजारों छात्रों का भविष्य भी जुड़ा हुआ है। बसपा प्रमुख ने सरकार से अपील की कि ऐसे मामलों में पहले नियमों के तहत समाधान तलाशा जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रदेश के अन्य शिक्षण संस्थानों में भी निर्माण संबंधी अनियमितताएं हैं तो उन्हें ध्वस्त करने के बजाय आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर नियमित करने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए।


गौरतलब है कि रामपुर विकास प्राधिकरण ने बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण को आधार बनाते हुए जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई प्रस्तावित की थी। इसके खिलाफ यूनिवर्सिटी पक्ष ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सोमवार को मुरादाबाद मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह की अदालत ने मामले में अंतरिम राहत देते हुए ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी। अधिकारियों के अनुसार सभी पक्षों को सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। फिलहाल इस मामले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है, जहां विपक्ष सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, जबकि प्रशासन इसे नियमों के पालन से जुड़ा मामला बता रहा है।