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आईएएस की तैयारी कर रहीं मायावती कांशीराम के संपर्क में कैसे आईं, 1989 में बनीं पहली बार सांसद
बहुजन समाज पार्टी (BSP) के गठन की कहानी में मायावती का राजनीतिक सफर बेहद महत्वपूर्ण रहा है।
- sakshi choudhary
- 22 Sep, 2026
बहुजन समाज पार्टी (BSP) के गठन की कहानी में मायावती का राजनीतिक सफर बेहद महत्वपूर्ण रहा है। राजनीति में आने से पहले मायावती प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रही थीं और दिल्ली के एक स्कूल में शिक्षिका के तौर पर काम करती थीं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की, इसके बाद बीएड और एलएलबी की शिक्षा पूरी की। इसी दौर में उनकी मुलाकात कांशीराम से हुई। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, 1977 में कांशीराम मायावती के घर पहुंचे थे। इस मुलाकात के बाद मायावती सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ने लगीं और आगे चलकर कांशीराम के आंदोलन का हिस्सा बनीं।
कांशीराम ने पहले BAMCEF और फिर DS-4 के जरिए बहुजन समाज को संगठित करने का प्रयास किया। 1978 में BAMCEF का गठन हुआ, जबकि 1981 में DS-4 के जरिए राजनीतिक संगठन खड़ा करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया। इसके बाद 14 अप्रैल 1984 को कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की। मायावती ने इसी वर्ष शिक्षिका की नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक रूप से राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। शुरुआती दौर में उन्होंने चुनावी राजनीति में भी कदम रखा। 1984 में कैराना और 1985 में बिजनौर से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों चुनावों में उन्हें जीत नहीं मिली। 1987 में हरिद्वार से भी चुनाव लड़ा और वहां भी सफलता नहीं मिली।
मायावती को पहली बड़ी चुनावी सफलता 1989 के लोकसभा चुनाव में मिली, जब उन्होंने बिजनौर सीट से जीत हासिल कर पहली बार संसद में प्रवेश किया। इस तरह कांशीराम के राजनीतिक आंदोलन से जुड़ने के कुछ वर्षों के भीतर ही मायावती राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बना चुकी थीं। बाद के वर्षों में उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ा। 1994 में वह पहली बार राज्यसभा पहुंचीं और 1995 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। वहीं, कांशीराम ने 2001 में मायावती को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया। इस तरह एक स्कूल शिक्षिका और प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रही युवती का सफर आगे चलकर बसपा के सबसे प्रमुख चेहरों में बदल गया।