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भारत में तपेदिक (TB) के मामले लगातार बढ़ते हुए, 2023 में दर्ज हुए 25.5 लाख मामले

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भारत ने पिछले दो दशकों में कई गंभीर बीमारियों पर विजय पाने में सफलता हासिल की है, लेकिन तपेदिक (टीबी) के खिलाफ लड़ाई में चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। भारत ने 2025 तक टीबी के उन्मूलन का लक्ष्य रखा है, लेकिन हाल के आंकड़े चिंताजनक हैं।

बढ़ते मामलों की चिंता

साल 2023 में भारत में टीबी के 25.37 लाख मामले दर्ज किए गए, जो 2022 के 24.22 लाख मामलों से अधिक हैं। यह बढ़ती संख्या सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि असल संख्या इससे भी अधिक हो सकती है, क्योंकि कई लोग जिनका निदान नहीं हुआ है, वे भी संक्रमण का शिकार हो सकते हैं।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, 2023 में दुनिया भर में 80 लाख से अधिक लोगों में टीबी का पता चला, जो पिछले वर्षों में दर्ज मामलों की सबसे अधिक संख्या है। 2022 में 75 लाख मामलों की तुलना में यह आंकड़ा बढ़ा है। हालांकि, टीबी से होने वाली मौतों में थोड़ी कमी आई है, फिर भी नए मामलों की बढ़ती संख्या ने चिंता बढ़ा दी है।

स्वास्थ्य कर्मियों पर असर

एक अध्ययन में पाया गया है कि भारत में स्वास्थ्य कर्मियों के बीच टीबी के मामले सामान्य आबादी की तुलना में काफी अधिक हैं। साल 2004 से 2023 के बीच किए गए अध्ययनों में प्रति एक लाख स्वास्थ्य कर्मियों पर औसतन 2,391.6 मामले देखे गए हैं, जो इस क्षेत्र में गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को दर्शाता है।

टीबी के लक्षण और सावधानियाँ

टीबी, माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला संक्रामक रोग है, जो मुख्यरूप से वायुजनित ड्रॉपलेट्स के माध्यम से फैलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी को दो सप्ताह से अधिक खांसी, कफ या खून आना, सीने में दर्द, कमजोरी, या रात में पसीना आना जैसी समस्याएँ हैं, तो यह टीबी के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत जांच कराना आवश्यक है, क्योंकि समय पर इलाज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

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