आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आने के बावजूद देश में आम जनता को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सरकारी तेल कंपनियों को "अवैध मुनाफा" कमाने की खुली छूट दे रही है। केजरीवाल ने मांग की कि वर्तमान में ₹102 प्रति लीटर बिक रहे पेट्रोल की कीमत घटाकर ₹82 प्रति लीटर की जाए और इसी अनुपात में डीजल के दाम भी कम किए जाएं। उनका कहना है कि मई 2026 से पेट्रोल की कीमतों में कोई कमी नहीं की गई, जबकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम पहले की तुलना में काफी नीचे आ चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें कम हुई हैं, तो देश में उपभोक्ताओं को राहत क्यों नहीं दी जा रही है।
केजरीवाल ने कहा कि यदि केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल के दाम कम करती है तो इसका सीधा फायदा देश की आम जनता को मिलेगा। ईंधन की कीमतों में कमी आने से परिवहन लागत घटेगी, जिससे खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा के सामान और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। उनका कहना है कि महंगाई पर नियंत्रण पाने का सबसे प्रभावी तरीका ईंधन की कीमतों में कटौती करना है। उन्होंने दावा किया कि पेट्रोल और डीजल सस्ते होने से माल ढुलाई की लागत कम होगी, उद्योगों का खर्च घटेगा और आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी कम होगा। केजरीवाल ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह तेल कंपनियों के मुनाफे के बजाय आम नागरिकों के हितों को प्राथमिकता दे और जल्द से जल्द ईंधन की कीमतों में राहत की घोषणा करे।
आप प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से अब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कम से कम छह बार बड़ी गिरावट दर्ज की गई, लेकिन उन अवसरों पर भी देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं की गई। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि इन वर्षों के दौरान तेल कंपनियों और सरकार द्वारा अर्जित अतिरिक्त राजस्व और मुनाफे का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया। केजरीवाल ने कहा कि जनता की जेब पर बोझ डालकर तेल कंपनियों को अत्यधिक लाभ कमाने देना उचित नहीं है और सरकार को पारदर्शिता के साथ इस पूरे मामले पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि ईंधन की कीमतों में तत्काल कटौती न केवल आर्थिक राहत देगी बल्कि बढ़ती महंगाई पर भी प्रभावी अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।