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MSME आधारित टेंडर प्रक्रिया में अनुभव और टर्नओवर में छूट: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जल एवं सीवर विभाग में उठ रहे सवाल

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ग्रेटर नोएडा। कपिल चौधरी

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जल एवं सीवर विभाग द्वारा टेंडर प्रक्रिया में बड़े बदलाव करते हुए छोटे और मंझोले उद्योगों (MSME) को अनुभव और टर्नओवर की शर्तों से छूट देकर टेंडर आवंटित किए गए हैं। इस फैसले ने कई तकनीकी और प्रबंधन से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। आये दिन कोई न कोई समस्या बनी रहती है।

गुणवत्ता और दक्षता पर सवाल

इस टेंडर प्रक्रिया में अनुभव और टर्नओवर की अनिवार्यता को समाप्त करने से कई विशेषज्ञ चिंतित हैं कि इससे काम की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जल और सीवर जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण और रखरखाव में व्यापक अनुभव की जरूरत होती है। अनुभवहीन कंपनियों द्वारा प्रोजेक्ट्स को संभालने से इन प्रणालियों की गुणवत्ता और दीर्घकालिक विश्वसनीयता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल और सीवर जैसी जटिल प्रणालियों के निर्माण में अनुभव का अभाव गंभीर खामियां पैदा कर सकता है, जो भविष्य में बड़े संकटों का कारण बन सकते हैं। ऐसी फर्मो के पास काम के लिया जरुरी मशीन और एक्यूपमेंट नहीं है।

वित्तीय अस्थिरता का खतरा

MSME को टर्नओवर की शर्त से छूट देने से यह आशंका बढ़ गई है कि कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर्याप्त न होने के कारण परियोजनाओं में देरी या अधूरी परियोजनाएं सामने आ सकती हैं। टर्नओवर का क्राइटेरिया सामान्य रूप से कंपनियों की वित्तीय क्षमता को मापने का एक महत्वपूर्ण मापदंड होता है। बिना वित्तीय स्थिरता के, कंपनियों के पास जरूरी संसाधनों की कमी हो सकती है, जिससे परियोजनाएं बीच में अटक सकती हैं या खराब गुणवत्ता के साथ पूरी हो सकती हैं। ये फार्म काम रेट पर टेंडर लेती है जो कि उस रेट काम करना मार्किट में असंभव माना जाता है।

लंबी अवधि की प्रभावशीलता पर चिंता

जल एवं सीवर व्यवस्था में रखरखाव और दीर्घकालिक संचालन एक जटिल प्रक्रिया है, जिसे पूरा करने के लिए उच्च स्तर की विशेषज्ञता और वित्तीय स्थिरता की आवश्यकता होती है। नए MSME फर्मों के पास लंबे समय तक इन प्रोजेक्ट्स का कुशलतापूर्वक संचालन और रखरखाव करने का अनुभव नहीं हो सकता, जिससे दीर्घकालिक विफलता की संभावना बढ़ जाती है।

विशेषकर, जब बात स्थायी सीवर लाइनों और जल निकासी की आती है, तो गलत निर्माण से शहर में जलभराव या सीवर ओवरफ्लो जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो नागरिकों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकती हैं।

स्थानीय ठेकेदारों में असंतोष

अनुभवी ठेकेदारों का मानना है कि इस नीति से उनकी प्रतिस्पर्धा और व्यवसायिक संभावनाओं पर चोट लगी है। लंबे समय से इन क्षेत्रों में काम कर रहे बड़े और अनुभवी ठेकेदारों का कहना है कि यह निर्णय गुणवत्तापूर्ण कार्य को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि टर्नओवर और अनुभव के बिना, परियोजनाओं की उचित योजना और कार्य असंभव हो सकता है।

पहले से दिख रहे परिणाम

कुछ परियोजनाओं में, जहां MSME कंपनियों को टेंडर दिए गए हैं, पहले से ही देरी और कम गुणवत्ता की शिकायतें सामने आ रही हैं। जल निकासी प्रणालियों की मरम्मत और सीवर लाइनों के रखरखाव में समस्याएं दिखने लगी हैं, और इससे स्थानीय निवासियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की इस नीति ने कई विवाद और आलोचनाएं खड़ी कर दी हैं। अनुभव और टर्नओवर की छूट से संबंधित जोखिम गंभीर हैं, जिनसे परियोजनाओं की गुणवत्ता, समय पर निष्पादन, और दीर्घकालिक रखरखाव प्रभावित हो सकते हैं। बिना पर्याप्त अनुभव और वित्तीय स्थिरता के, जल और सीवर जैसी आवश्यक सेवाओं का सुचारू संचालन असंभव हो सकता है, जिससे शहर की बुनियादी सुविधाएं प्रभावित होंगी।

आवश्यक है कि प्राधिकरण इस नीति पर पुनर्विचार करे और गुणवत्ता मानकों के साथ किसी भी तरह का समझौता न हो, ताकि शहर की सेवाएं लंबे समय तक सुरक्षित और प्रभावी रह सकें।

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