Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● बारिश में जलभराव पर सिर्फ प्राधिकरण नहीं, नागरिकों की भी है बराबर जिम्मेदारी ● यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत 77,007 पौधों का रोपण, स्कूली बच्चों ने भी लिया हिस्सा ● ग्रेटर नोएडा सेक्टर-36 RHO-1 में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत हुआ वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश ● नोएडा में विदेशी नागरिकों से Cyber Fraud करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, Bisrakh Police ने 6 आरोपियों को किया गिरफ्तार ● नोएडा सेक्टर-2 में फर्जी Loan Call Center का भंडाफोड़, करोड़ों की Cyber Fraud करने वाले 5 आरोपी गिरफ्तार ● ग्रेटर नोएडा के कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी जांच शुरू, मानक पूरे न करने पर सीलिंग की चेतावनी ● ग्रेटर नोएडा में सफाई व्यवस्था होगी और मजबूत, 3000 नए सफाई कर्मियों की होगी तैनाती ● UP Panchayat News: जिला पंचायत अध्यक्ष बने प्रशासक, ब्लॉक प्रमुखों पर भी जल्द लागू होगी नई व्यवस्था ● अलीगढ़ में यमुना प्राधिकरण का बड़ा एक्शन: 450 करोड़ की अवैध कॉलोनियों पर चला बुलडोजर, डेढ़ लाख वर्गमीटर भूमि कराई कब्जामुक्त ● UP Weather Today: यूपी में मानसून पूरी तरह सक्रिय, 46 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

हिन्दी भाषा की पहचान: इतिहास, विकास और आधुनिक समय में भाषाई बदलाव

top-news

नोएडा।साक्षी चौधरी

मातृभूमि और मातृभाषा किसी भी व्यक्ति की पहचान होती हैं। मगर ये बड़ी शर्म की बात होगी, जब कोई व्यक्ति अपने ही वजूद पर शर्मिंदा हो जाए। हिन्दुस्तान जैसा देश, जहाँ लगभग 150 करोड़ की आबादी बसती है, जहाँ आम तौर पर अलग-अलग संस्कृति और रिवाज की नुमाइश देखने को मिलती है, वहाँ हिन्दी भाषा को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया है।

साल 2011 में की गई जनगणना के अनुसार, भारत की 43.63% आबादी ऐसी है, जिनकी मातृभाषा हिन्दी है। बावजूद इसके, आज की युवा पीढ़ी द्वारा हिन्दी के अलावा अन्य भाषाओं को महत्त्व देना अपने आप में बेहद दुखदायी है। हालांकि, साल 2001 में यह संख्या 41.03% से बढ़कर साल 2011 में 43.63% हो गई है।

चलिए, आपको बताते हैं हिन्दी शब्द का इतिहास और कब हुई इसकी शुरुआत।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर के अनुसार, हिन्दी शब्द की उत्पत्ति ईरान से हुई है। ईरान के सम्राट (500 ई.पू.) द्वारा अभिलेखों में “हिन्दु” शब्द आया है। उन अभिलेखों में “हिन्दु” शब्द का प्रयोग “सिन्धु” शब्द के स्थान पर किया गया है। “हिन्दु” शब्द वास्तव में “सिन्धु” का फ़ारसी रूप है। फ़ारसी में “स” का उच्चारण “ह” होता है, और “सिन्धु” बन गया “हिन्दु”। आगे चलकर “हिन्दु” का “उ” गायब हो गया और बच गया “हिन्द”।

शुरुआती दिनों में ईरानी लोग सिन्धु नदी के किनारे बसे इलाके को हिन्द कहते थे। धीरे-धीरे पूरे भारत के लिए हिन्द शब्द का प्रयोग होने लगा। आगे चलकर “हिन्द” में “ईक” प्रत्यय लगने से “हिन्दीक” शब्द बना, और फिर “हिन्दीक” से “क” के गायब हो जाने पर “हिन्दी” बना। हिन्दी शब्द का मतलब भारत का निवासी, वस्तु और भारत में बोले जाने वाली तमाम भाषाओं से था। मगर समय के साथ-साथ हिन्दी खुद एक भाषा के रूप में परिवर्तित हो गई, जिसकी लिपि देवनागरी हुई।

समय के साथ गायब होती गई हिन्दी भाषा की बिंदु और चन्द्र-बिंदु।
समय के साथ-साथ भारत निवासियों की प्राथमिकता अन्य भाषाएं बनती गईं। लोगों का झुकाव अन्य भाषाओं की तरफ इतना बढ़ गया कि अंग्रेजी, जो पश्चिमी भाषा थी और जिसकी गुलामी से निकलने के लिए हमने घोर युद्ध लड़े और आज़ाद हुए, मगर अफ़सोस है कि आज भी हम अपनी बोली की सुंदरता बढ़ाने के लिए अंग्रेजी का इस्तेमाल मेकअप की तरह करते हैं।

समय के साथ अंग्रेजी हम भारतवासियों के मन में ऐसा घर कर गई कि आज हम हिन्दुस्तानी अभिभावकों की पहली प्राथमिकता अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में भेजने की होती है। अंग्रेजी की तरफ बढ़ते झुकाव के साथ-साथ हिन्दी की आत्मा कहे जाने वाले बिंदु और चन्द्रबिंदु तो आज गायब ही हो गए हैं। जहाँ “हैं” को “है” लिखा जाता है, तो वहीं “बच्चें” शब्द “बच्चे” कब बन गया, पता भी नहीं चला। और हमने हिन्दी की सुंदरता को ही खो दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *