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डिजिटल अरेस्ट: एक नए प्रकार की ठगी से बचने के उपाय

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नोएडा। दिव्यांशु ठाकुर

डिजिटल अरेस्ट वर्तमान में भारत में सबसे तेजी से फैलने वाला स्कैम है। आमतौर पर यह माना जाता है कि ठगी का शिकार केवल कम पढ़े-लिखे लोग होते हैं, लेकिन अब यह देखा जा रहा है कि ज्यादा शिक्षित और तकनीकी रूप से जानकार लोग भी इसके शिकार बन रहे हैं। पिछले एक साल में हजारों लोगों को डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगा गया है और करोड़ों रुपये की ठगी की गई है। आश्चर्यजनक बात यह है कि अब तक इस स्कैम के शिकार ज्यादातर इंजीनियर रहे हैं। आइए समझते हैं कि डिजिटल अरेस्ट क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

डिजिटल अरेस्ट क्या है?

डिजिटल अरेस्ट एक एडवांस ब्लैकमेलिंग तकनीक है, जिसमें ठग आपको ऑनलाइन धमकाते हैं और वीडियो कॉल के माध्यम से आपकी निगरानी करते हैं। इस प्रकार के स्कैम में, साइबर ठग नकली पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को धमकाते हैं और उन्हें अपना शिकार बनाते हैं।

डिजिटल अरेस्ट की कार्यप्रणाली

डिजिटल अरेस्ट में ठग आपको फोन करके बताते हैं कि वे पुलिस या इनकम टैक्स विभाग से हैं और आपके पैन और आधार का इस्तेमाल कर विभिन्न अवैध गतिविधियों का दावा करते हैं। इसके बाद वे आपको वीडियो कॉल पर बुलाते हैं और कहते हैं कि आप किसी से बात या मैसेज नहीं कर सकते। इस दौरान जमानत के नाम पर पैसे की मांग की जाती है और लोग अपने ही घर में ऑनलाइन कैद हो जाते हैं।

सुरक्षा के उपाय

यदि आपको इस प्रकार के धमकी भरे कॉल आते हैं, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। तुरंत पुलिस में शिकायत करें और कोई भी संदिग्ध मैसेज या ई-मेल पुलिस को सबूत के रूप में दें। यदि आपने वीडियो कॉल रिसीव किया है और धमकी दी जा रही है, तो कॉल की स्क्रीन रिकॉर्डिंग करें और उसे पुलिस को सौंपें। किसी भी हालत में पैसे न भेजें और डरने की बजाय साहसिकता से काम लें।

सावधानियां:

  • अनजान कॉल्स पर भरोसा न करें।
  • किसी भी धमकी भरे कॉल पर डरने की बजाय सीधे तौर पर पुलिस से संपर्क करें।
  • निजी जानकारी जैसे घर का पता, बैंक अकाउंट विवरण, आधार कार्ड, और पैन कार्ड की जानकारी न दें।
  • किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत रिपोर्ट पुलिस थाने में करें।

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