Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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आरटीई दाखिला न देने पर निजी स्कूलों को कड़ी चेतावनी. एक सप्ताह में दाखिले के निर्देश

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गुरुवार को कलेक्ट्रेट के सभागार में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत दाखिला नहीं देने पर निजी स्कूलों के साथ बैठक की। इस बैठक में स्कूलों को फटकार लगाते हुए एक सप्ताह के भीतर दाखिला देने और उसकी रिपोर्ट शिक्षा विभाग को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। निर्देशों का पालन न करने पर स्कूलों की मान्यता रद्द करने की सिफारिश शासन को भेजी जाएगी।

शिक्षा विभाग ने आरटीई के तहत लॉटरी के माध्यम से बच्चों का स्कूल आवंटन किया है, लेकिन कई निजी स्कूल मनमानी कर रहे हैं। इस वजह से दाखिला न होने पर बच्चे और उनके अभिभावक बेसिक शिक्षा विभाग और स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं। लगातार आ रही शिकायतों के चलते गुरुवार को प्रशासन ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के 61 स्कूलों को कलेक्ट्रेट में बुलाया, लेकिन केवल 46 स्कूल ही बैठक में पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि इन 61 स्कूलों में 1076 बच्चों का दाखिला आरटीई के तहत होना है, लेकिन अब तक केवल 400 बच्चों को ही दाखिला दिया गया है। शेष 670 बच्चे अभी भी दाखिला मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

अधिकारियों ने कहा कि सभी स्कूलों को एक सप्ताह का समय दिया गया है। इस अवधि के भीतर सभी बच्चों का दाखिला सुनिश्चित करना होगा। अगर कोई स्कूल इस मामले में आनाकानी करेगा तो उसकी जवाबदेही तय करते हुए नोटिस जारी किया जाएगा।

बैठक में कई स्कूलों ने बच्चों के आपात्र होने का हवाला दिया और दावा किया कि बच्चों के अभिभावक गरीब नहीं हैं। इस पर एडीएम (प्रशासन) ने कहा कि अगर किसी स्कूल के पास बच्चों के आपात्र होने के साक्ष्य हैं, तो वे शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराएं, जिनकी जांच की जाएगी। स्कूल इस पर स्वयं निर्णय नहीं ले सकते। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर किसी अधिकारी ने फर्जी दस्तावेज जारी किए हैं या अभिभावकों ने फर्जी दस्तावेज दिए हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

डा. नितिन मदान, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), ने स्पष्ट किया कि सभी स्कूलों को एक सप्ताह के भीतर आरटीई के तहत दाखिले करने होंगे। ऐसा नहीं करने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। यदि स्कूलों के पास आपात्र होने के साक्ष्य हैं, तो उन्हें शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराएं और उनकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी