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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : किसान सिर्फ किसान होता है, पुश्तैनी व गैर पुश्तैनी नहीं

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ग्रेटर नोएडा। कपिल चौधरी

ग्रेटर नोएडा के किसान लगभग एक दशक से अपने हक के लिए कोर्ट में लड़ रहे थे आखिरकार पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने यह माना की किसान सिर्फ किसान होता है पुश्तैनी या गैर पुश्तैनी नहीं। हजारों किसानों और काश्तकारों के लिए खुशी की खबर है की उच्चतम न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले से पुश्तैनी और गैर पुश्तैनी का जो भेद, प्राधिकरणों द्वारा किया जा रहा था, उसको समाप्त करके, सबके लिए समान मुआवजा वितरण और अन्य सभी सुविधाएं समान रूप से देने के लिए फैसला पारित किया है।
अभी तक पुश्तैनी जमीनदार को, गैर पुश्तैनी जमीनदार की तुलना में तीन रुपया प्रति गज अतिरिक्त मुवावजा, 15 प्रतिशत अतिरिक्त पुनर्स्थापना बोनस एवं 6% प्रतिशत का विकसित प्लॉट दिया जाता था, जबकि गैर पुश्तैनी को ये अतिरिक्त लाभ नहीं दिए जाते थे। इससे लोगो में रोष था और अनेक लोगो ने प्राधिकरणों के इस निर्णय के विरुद्ध याचिका दायर कर न्याय की मांग की थी।

सिविल अपील संख्या 8819/2022, जोकि स्पेशल लीव पेटिशन संख्या 11447/2018 के अंतर्गत प्रस्तुत हुई थी, और जोकि सिविल अपील संख्या 8820 और 8821 के साथ संयुक्त रूप से निर्णित की गई। उसमे माननीय न्यायाधीश कृष्णमुरारी एवं माननीय न्यायाधीश एस रविंद्र भट्ट की संयुक्त पीठ ने यह निर्णय दिया की, प्राधिकरण किसी भी काश्तकार के मुवाबजा वितरण के समय इस बात का कोई भेदभाव नहीं करेगा की काश्तकार पुश्तैनी है अथवा गैर पुश्तैनी और सभी एक समान मुआवजा तथा अन्य लाभों के अधिकारी होंगे।

यह निर्णय 20 फरवरी 2023 को आ चुका है, परंतु प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी जिन पर ये जिम्मेदारी थी की इस निर्णय को अधिक से अधिक प्रकार से सार्वजनिक कर, लोगो को उनका हक पाने में सहयोग करते, वही इस निर्णय को एक वर्ष से भी अधिक समय से दबाए बैठे हैं।