Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत 77,007 पौधों का रोपण, स्कूली बच्चों ने भी लिया हिस्सा ● ग्रेटर नोएडा सेक्टर-36 RHO-1 में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत हुआ वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश ● नोएडा में विदेशी नागरिकों से Cyber Fraud करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, Bisrakh Police ने 6 आरोपियों को किया गिरफ्तार ● नोएडा सेक्टर-2 में फर्जी Loan Call Center का भंडाफोड़, करोड़ों की Cyber Fraud करने वाले 5 आरोपी गिरफ्तार ● ग्रेटर नोएडा के कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी जांच शुरू, मानक पूरे न करने पर सीलिंग की चेतावनी ● ग्रेटर नोएडा में सफाई व्यवस्था होगी और मजबूत, 3000 नए सफाई कर्मियों की होगी तैनाती ● UP Panchayat News: जिला पंचायत अध्यक्ष बने प्रशासक, ब्लॉक प्रमुखों पर भी जल्द लागू होगी नई व्यवस्था ● अलीगढ़ में यमुना प्राधिकरण का बड़ा एक्शन: 450 करोड़ की अवैध कॉलोनियों पर चला बुलडोजर, डेढ़ लाख वर्गमीटर भूमि कराई कब्जामुक्त ● UP Weather Today: यूपी में मानसून पूरी तरह सक्रिय, 46 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट ● नोएडा एयरपोर्ट से श्रीनगर की डायरेक्ट फ्लाइट शुरू, अब सिर्फ 1 घंटा 25 मिनट में पहुंचेंगे यात्री

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण: वित्त विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर, भुगतान पर लिया जाता है कमीशन

top-news

ग्रेटर नोएडा। कपिल चौधरी

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वित्त विभाग में भ्रष्टाचार पूरे चरम पर है। वित्त विभाग पर प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की जिम्मेदारी है लकिन उस विभाग के अधिकारी कर्मचारी अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में लगे हैं। कहा जाता है कि प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति चाहे कैसी भी रहे, लेकिन वित्त विभाग के ज्यादातर कर्मचारियों अधिकारियों के आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत है और इस विभाग में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं जिनका कभी ट्रांसफर ही नहीं हुआ। एक दशक से भी ज्यादा समय से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वित्त विभाग में ही तैनात है।

बेहद करीबी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभाग में ज्यादातर फाइल बिना कमीशन दिए नहीं होती है। चाहे ठेकेदार की पेमेंट की फाइल हो, या बिल्डरों की कोई फाइल हो, इंडस्ट्री की कोई कैलकुलेशन हो, किसी भी प्रकार की कोई फाइल अगर वित्त विभाग में जाती है तो बिना कमीशन दिए उस फाइल पर हस्ताक्षर नहीं होते हैं।

पेमेंट की फाइलों पर 1.5 प्रतिशत कमीशन लिया जाता है। जिसका हिसाब लेखाकार रखते हैं और इसके साथ ही भुगतान करने पर भी कमीशन लिया जाता है और आरटीजीएस करने की एज में अगर भुगतान की राशि 50 लाख तक है तो 5 हज़ार कमीशन लिया जाएगा और अगर इससे ऊपर है तो 10 हज़ार कमीशन लिया जाता है। अगर काम बिल्डर या किसी इंडस्ट्री का है तो फिर यह कमीशन की राशि लाखों रुपए में हो जाती है 5 से 10 लाख रुपए रिश्वत आम बात है और इस सभी पैसे का हिसाब लेखाकार ही रखते हैं और वही लोग इस पैसे की उगाई करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *