Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● दिल्ली-NCR में उमस का डबल अटैक जारी, एक हफ्ते तक नहीं मिलेगी राहत! जानें 20 जुलाई तक का मौसम अपडेट ● Noida Fire: ममूरा गांव की G+4 इमारत में EV बैटरी ब्लास्ट के बाद भीषण आग, धुएं से महिला-पुरुष समेत 2 की मौत ● Supertech Eco Village-1: 30 फीट गहरे गड्ढे का ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने किया निरीक्षण, बिल्डर को 4 दिन में सुरक्षा इंतजाम पूरे करने के निर्देश ● ग्रेटर नोएडा में 16 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन निरस्त, 10 उद्यमियों ने रीस्टोरेशन की मांग की ● नोएडा में सीवर सफाई के दौरान सफाईकर्मी की मौत, सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल ● यूपी पुलिस SI भर्ती 2025 का अंतिम परिणाम जारी, 4543 अभ्यर्थियों का चयन, ऐसे करें रिजल्ट चेक ● Trump का यू-टर्न: होर्मुज जलडमरूमध्य में 20% शुल्क का प्रस्ताव वापस, अब खाड़ी देशों से निवेश पर फोकस ● रात्रिकालीन निरीक्षण में ईकोटेक-3 की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था का जायजा, जल्द पूरी तरह रोशन होगा औद्योगिक क्षेत्र ● तिलपता रोटरी पर जाम से मिलेगी राहत, ग्रेटर नोएडा में बनेगा 4 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड ● ग्रेटर नोएडा में सनसनीखेज वारदात: पिज्जा लेने निकले प्रॉपर्टी डीलर की कार में मिली लाश, सीने में लगी थी गोली

Health: Bill Gates को है एस्परगर सिंड्रोम, बेटी फोबे ने किया खुलासा

top-news

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार और माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ‘एस्परगर सिंड्रोम’ नामक न्यूरोडेवलपमेंट समस्या से पीड़ित हैं। यह जानकारी उनकी बेटी फोबे गेट्स ने हाल ही में एक पॉडकास्ट ‘कॉल हर डैडी’ में साझा की। फोबे ने बताया कि उनके पिता सामाजिक रूप से थोड़े अजीब हैं और यह स्थिति कई बार परिवार के लिए अजीबोगरीब हो जाती है। उन्होंने एक उदाहरण साझा करते हुए कहा कि जब वह अपने बॉयफ्रेंड को घर लेकर आईं तो उनके लिए बिल गेट्स से मिलना एक भयानक अनुभव था।

एस्परगर सिंड्रोम को अब एक अलग बीमारी नहीं माना जाता, बल्कि यह ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) का हिस्सा है। इससे ग्रस्त व्यक्ति को आई कॉन्टैक्ट, चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज समझने और प्रयोग करने में कठिनाई होती है। ऐसे लोग बातचीत में असहज महसूस कर सकते हैं और कई बार एक ही बात को दोहराते रहते हैं, जिससे संवाद और जटिल हो जाता है।

इस समस्या के पीछे के कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों का परिणाम मानते हैं। इसका कोई निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन सपोर्टिव थेरेपी से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर निदान कर सहायक चिकित्सा देते हैं जिससे प्रभावित व्यक्ति सामान्य जीवन बेहतर ढंग से जी सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *