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प्राधिकरण का तानाशाही रवैया, किसानों की रात सड़क पर गुजार रही, जनप्रतिनिधि चुनाव प्रचार में मस्त किसानों से बनाई दूरी

ग्रेटर नोएडा। कपिल तोंगड़

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसान पिछले कई दिनों से आंदोलनरत है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण किसानों का महापड़ाव लगभग पिछले सप्ताह से चल रहा है। जिसमें क्षेत्र के किसान दिन रात ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के गेट पर धरना दे रहे हैं। लेकिन बड़े दुःख की बात है कि जनप्रतिनिधि किसानों से मिलना ही नहीं चाहते। किसान ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण गेट के बाहर धरना दे रहे हैं लेकिन उसके बावजूद भी कोई उनकी समस्या को सुनने के लिए तैयार नहीं है। जिनको अपनी समस्या हल करने के लिया चुना था वो आज पास भी नहीं आ रहे है। जनप्रतिनिधि चाहे सांसद हो या विधायक हो किसानों को लगातार नजरअंदाज करते आ रहे हैं। क्षेत्र की जनता ने इन्हें अपना विधायक सांसद अपनी समस्याओं का समाधान कराने के लिए ही चुना था। ना कि सिर्फ शादियों में खाने और फोटो खिंचवाने के लिए।

जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बनती है कि उनके क्षेत्र कोई भी समस्या हो उसे शांति से सुना जाए और उसके समाधान के लिए कोशिश की जाए। लेकिन यह दुख की बात है क्षेत्र के सत्ता के विधायक और सांसद किसानो से मिलने के लिए ही तैयार नहीं है। मजबूरन किसानों को सड़क पर उतरना पड़ रहा है मंगलवार की दोपहर भारी संख्या में इकट्ठा होकर किसान ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पहुंचे। किसानों का कहना है कि जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी हम पीछे नहीं हटेंगे और हमारा महापड़ाव जारी रहेगा। यदि हमें जरूरत पड़ी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के दोनों गेट को बंद करेंगे। साथ ही यदि जेल जाना पड़ा तो किसान उसके लिए भी तैयार है इस बार हम पूरी तैयारी के साथ आए हैं। अब बड़ा आंदोलन होगा। जनप्रतिनिधि किसानों की समस्याओं को सुन नहीं रहे हैं किसानों को नजरअंदाज किया जा रहा है अगर किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होते हैं तो जनप्रतिनिधि हाथ पर हाथ रखकर बैठे होते हैं। आम जनता और किसान जाए तो अपनी समस्या लेकर किसके पास जाएं।

प्राधिकरण में लूट मची हुई है ऐसा लगता है कि ऊपर से आदेश दिया गया है कि जैसे भी हो धन इकट्ठा किया जाए। जनता चाहे कितनी भी परेशान हो उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है। प्राधिकरण ने बिल्कुल तानाशाही रवैया अपना लिया है। जिस किसान ने शहर को बसाने के लिए सस्ते दामों पर अपनी बहुमूल्य जमीन दी आज उसी की एवज में मिलने वाले हक के लिए उसे अपने दिन-रात सड़क पर गुजारने पड़ रहे हैं। किसान के लिए इससे बुरे दिन और क्या होंगे?

किसानों की प्रमुख मांगे:-

  • 10% आबादी के खत्म किए प्लॉट किए जाए
  • आबादियों की लीजबैक की जाए
  • सर्किल रेट का 4 गुना मुआवजा मिले
  • किसानों को 17.5% प्लॉट कोटा बहाल किया जाए
  • किसानों के लिए सिफ्टिंग पॉलिसी चालू हो
  • किसानों को 120 वर्ग मीटर का न्यूनतम प्लॉट मिले
  • मुझे बढ़ाने के लिए सर्किल रेट बढ़ाया जाए

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