Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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गुर्जर-जाट-मुस्लिम गठजोड़ से निकाय चुनाव के लिए उभरे नए समीकरण

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नोएडा: मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा के उपचुनाव के परिणाम से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नए समीकरण उभर कर आए हैं। गुर्जर-जाट-मुस्लिम गठजोड़ के कारण रालोद प्रत्याशी मदन भैया की जीत ने भाजपा के लिए निकाय चुनाव में चुनौती पेश कर दी है।
हालांकि, पूर्व में गुर्जर और जाट मतदाताओं ने किसी भी चुनाव में कभी एक दल के पक्ष में एकजुट होकर मतदान नहीं किया। गत विधानसभा चुनाव में भी किसान आंदोलन से नाराज हुए जाट सपा-रालोद गठबंधन के साथ गए थे। जबकि कुछ विधानसभा क्षेत्रों को छोड़ दें तो गुर्जरों का अधिकांश वोट भाजपा के पक्ष में गया था।
विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा ने जाटों को मनाने की भरपूर कोशिश की। उपराष्ट्रपति से लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की कमान भी जाट बिरादरी के नेताओं को सौंपी गई। इसके बावजूद जाटों की नाराजगी खतौली विधानसभा के उपचुनाव में भी बरकरार रही। वहीं दूसरी तरफ संगठन और उत्तर प्रदेश सरकार में उचित प्रतिनिधित्व न मिलने से गुर्जर भी भाजपा से नाराज हो गए।
आगामी चुनाव में परेशानी का सबब बन सकता है गठजोड़
गुर्जरों को लगता है कि भाजपा उनकी उपेक्षा कर रही है। यही वजह जाट और गुर्जरों में गठजोड़ का कारण बनी। एक साथ मिलकर किसी दल को वोट न देने की परंपरा भी इसी वजह से टूटी। इनका गठजोड़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा व बाकी अन्य दलों के लिए आगामी चुनाव में यह परेशानी का सबब बन सकता है।
दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और गुर्जर बहुलता में हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 150 निकायों में भी इनकी तादाद काफी है। पिछली बार भाजपा ने 33 निकायों में जीत हासिल कर नगर निगम के मेयर व नगरपालिका और नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद पर कब्जा किया था।
निकाय चुनाव में नए समीकरण पैदा होंगे
गुर्जर-जाट गठजोड़ निकाय चुनाव में भी बरकरार रहा और इनके साथ मुस्लिम मतदाता भी जुड़े रहे तो पश्चिमी उत्तर के नगर निगम व नगर पालिका चुनाव में नए समीकरण पैदा होंगे। मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर नगर निगम व खतौली, शामली, कैराना, तितरो, हसनपुर, बुढ़ाना, खेकड़ा, देवबंद, लोनी, डासना, गढ़, खोड़ा, दादरी नगर पालिका ऐसी हैं, जिनमें इन तीनों का गठजोड़ चौकाने वाले परिणाम दे सकता है।