Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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Pakistani Hindu Refugees: पाकिस्तान से भारत आए हिन्दू शरणार्थियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत! जाने क्या है पूरी खबर

Pakistani Hindu Refugees: पाकिस्तान (Pakistan) से आकर दिल्ली के मजनू का टीला (Majnu Ka Tilla) इलाके में बसे हिंदू शरणार्थियों (Hindu Refugees) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को एक अहम आदेश में शरणार्थियों को उनके आश्रयों से हटाने पर रोक लगा दी है। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है। यह आदेश उन शरणार्थियों की याचिका पर आया है, जिन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के फैसले को चुनौती दी थी।
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Pakistani Hindu Refugees: पाकिस्तान (Pakistan) से आकर दिल्ली के मजनू का टीला (Majnu Ka Tilla) इलाके में बसे हिंदू शरणार्थियों (Hindu Refugees) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को एक अहम आदेश में शरणार्थियों को उनके आश्रयों से हटाने पर रोक लगा दी है। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है। यह आदेश उन शरणार्थियों की याचिका पर आया है, जिन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के फैसले को चुनौती दी थी।


दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 मई को आदेश दिया था कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र (Flood Zone) में बने अस्थायी शिविरों को हटाना होगा, क्योंकि ये पर्यावरणीय मानकों (Environmental Norms) का उल्लंघन करते हैं। इसके बाद जुलाई में डीडीए ने Pakistani Hindu Refugees को नोटिस जारी कर चेतावनी दी थी कि किसी भी समय बुलडोज़र चलाया जा सकता है। इसी के खिलाफ शरणार्थियों की ओर से वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन (Vishnu Shankar Jain) ने सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम राहत की मांग की थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाकर शरणार्थियों को तत्काल सुरक्षा दी।


मजनू का टीला इलाके में करीब 300 से अधिक पाकिस्तानी हिंदू परिवार पिछले कई वर्षों से टिन और टेंट के अस्थायी घरों में रह रहे हैं। इनमें से अधिकतर शरणार्थी सिंध प्रांत (Sindh Province) से पलायन कर भारत आए थे। इन परिवारों का कहना है कि भारत (India) ने उन्हें शरण देकर जीवनदान दिया है, लेकिन हमेशा यह डर बना रहता है कि कहीं Pakistani Hindu Refugees आशियाना छिन न जाए। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब इन परिवारों ने राहत की सांस ली है और कहा है कि यह फैसला उनके लिए “Hope of Life” है।


कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल मानवीय आधार पर ही नहीं बल्कि पर्यावरणीय और प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी अहम है। आने वाली सुनवाई में यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट नागरिकता (Citizenship) और स्थायी पुनर्वास (Permanent Rehabilitation) को लेकर क्या रुख अपनाता है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश Pakistani Hindu Refugees के लिए जीने की नई उम्मीद (New Hope) लेकर आया है।