Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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H-1B Visa Fee Relief: भारतीयों को बड़ी राहत, USCIS ने जारी की नई Guidelines! यहाँ जाने पूरी खबर

H-1B Visa Fee Relief: ट्रंप प्रशासन ने H-1B Visa Policy में बड़ा बदलाव करते हुए एक महत्वपूर्ण राहत का ऐलान किया है। नई गाइडलाइंस के तहत अब कुछ आवेदकों को 100,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) की भारी फीस से छूट दी जाएगी। USCIS (U.S. Citizenship and Immigration Services) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह नई फीस केवल उन मामलों पर लागू होगी जिनके आवेदन 21 सितंबर 2025 के बाद जमा किए गए हैं। यानी जो व्यक्ति पहले से अमेरिका में वैध H-1B Visa पर हैं या अपनी वीजा स्थिति में परिवर्तन, विस्तार या संशोधन कर रहे हैं, उन्हें यह फीस नहीं देनी होगी।
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H-1B Visa Fee Relief: ट्रंप प्रशासन ने H-1B Visa Policy में बड़ा बदलाव करते हुए एक महत्वपूर्ण राहत का ऐलान किया है। नई गाइडलाइंस के तहत अब कुछ आवेदकों को 100,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) की भारी फीस से छूट दी जाएगी। USCIS (U.S. Citizenship and Immigration Services) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह नई फीस केवल उन मामलों पर लागू होगी जिनके आवेदन 21 सितंबर 2025 के बाद जमा किए गए हैं। यानी जो व्यक्ति पहले से अमेरिका में वैध H-1B Visa पर हैं या अपनी वीजा स्थिति में परिवर्तन, विस्तार या संशोधन कर रहे हैं, उन्हें यह फीस नहीं देनी होगी।


किन्हें मिलेगी छूट और क्यों है यह राहत खास?

USCIS ने स्पष्ट किया है कि यह राहत उन लोगों को मिलेगी जो पहले से अमेरिका में रह रहे हैं और अपने H-1B Visa की स्थिति को अपडेट कर रहे है, जैसे स्टूडेंट से प्रोफेशनल जॉब में बदलाव या वीजा एक्सटेंशन के लिए आवेदन। इसके अलावा, वे वीजा होल्डर्स जो अस्थायी रूप से अमेरिका छोड़कर उसी वैध वीजा पर लौट रहे हैं, उन पर भी नई फीस लागू नहीं होगी। हालांकि, यदि कोई आवेदक इन पात्र श्रेणियों में नहीं आता, तो उस पर USD 100,000 Visa Fee लागू रहेगी। यह कदम उन हजारों भारतीय IT Professionals, इंजीनियरों और स्टार्टअप कर्मियों के लिए राहत लेकर आया है जो अमेरिका में काम कर रहे हैं।


Indian Tech Community के लिए राहत क्यों अहम?

ध्यान देने योग्य है कि H-1B Visa Holders में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 71% है। यह वीजा विशेष रूप से उन विदेशी पेशेवरों के लिए है जो अमेरिका की टेक, इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक कंपनियों में कार्यरत हैं। ट्रंप प्रशासन की नई नीति का उद्देश्य विदेशी श्रमिकों की संख्या पर नियंत्रण करना था, लेकिन US Chamber of Commerce ने इसे कोर्ट में चुनौती दी, यह कहते हुए कि यह निर्णय अमेरिकी इनोवेशन और ग्लोबल कंपटीशन को नुकसान पहुंचाएगा। अब USCIS की नई गाइडलाइंस भारतीय प्रोफेशनल्स, स्टूडेंट्स और स्टार्टअप्स के लिए game-changer साबित हो सकती हैं, क्योंकि इससे उनकी वित्तीय और पेशेवर बाधाएं काफी हद तक कम हो जाएंगी।