Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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AAP नेताओं पर हाईकोर्ट का अवमानना नोटिस, केजरीवाल-सिसोदिया समेत चार हफ्ते में जवाब तलब

दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति मामले से जुड़े एक स्वतः संज्ञान (suo motu) आपराधिक अवमानना केस में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia और राज्यसभा सांसद Sanjay Singh सहित अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया है। यह मामला कथित तौर पर अदालत की कार्यवाही और न्यायाधीशों पर की गई सोशल मीडिया टिप्पणियों और सार्वजनिक बयानों से जुड़ा हुआ है, जिन्हें अदालत की गरिमा के खिलाफ माना जा रहा है। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की पीठ ने इस मामले में सभी आरोपियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति मामले से जुड़े एक स्वतः संज्ञान (suo motu) आपराधिक अवमानना केस में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia और राज्यसभा सांसद Sanjay Singh सहित अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया है। यह मामला कथित तौर पर अदालत की कार्यवाही और न्यायाधीशों पर की गई सोशल मीडिया टिप्पणियों और सार्वजनिक बयानों से जुड़ा हुआ है, जिन्हें अदालत की गरिमा के खिलाफ माना जा रहा है। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की पीठ ने इस मामले में सभी आरोपियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।


मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखा जाए और एक न्याय मित्र (amicus curiae) की भी नियुक्ति की गई है, ताकि निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, यह अवमानना मामला उस समय सामने आया जब न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की आवश्यकता जताई थी। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया और न्यायपालिका की गरिमा पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी या आचरण स्वीकार्य नहीं है और ऐसे मामलों को गंभीरता से देखा जाएगा।


इस पूरे प्रकरण में अदालत ने साफ किया है कि मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। आरोप है कि कुछ नेताओं द्वारा सोशल मीडिया, वीडियो और पत्रों के माध्यम से न्यायाधीश की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। अदालत ने इसे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया को तेज कर दिया है। अब सभी पक्षों से विस्तृत जवाब आने के बाद ही मामले में अगला कदम तय किया जाएगा।