Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING
NEWS
● ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में अधिकारियों के कार्यों का फेरबदल, 130 मीटर रोड और अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी तय
● ग्रेटर नोएडा की सोसायटी पार्किंग में फॉर्च्यूनर के टायर-रिम से छेड़छाड़, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
● यूपी में PDA पर सियासी घमासान, योगी के बयान पर अखिलेश का पलटवार
● PM Modi: भाजपा की नई टीम के साथ आज बैठक, पदाधिकारियों को करेंगे संबोधित
● दिल्ली में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की हत्या, ससुराल पक्ष पर पीट-पीटकर मारने का आरोप
● नोएडा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने निजी लैब का किया उद्घाटन
● ग्रेटर नोएडा में 15 कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई, बंद करने का नोटिस
● सड़क किनारे अतिक्रमण पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की बड़ी कार्रवाई, 12 अवैध दुकानें ध्वस्त
● विजय इंटरनेशनल स्कूल में प्री-प्राइमरी विद्यार्थियों के लिए जागरूकता गतिविधि आयोजित
● Migson Ultimo Society में पानी की जांच, TDS मानक के अनुरूप; Greater Noida Authority ने सोसाइटी प्रबंधन को भेजा Notice
CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान: कानून तक समान पहुंच से ही होगी वास्तविक समानता
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) Surya Kant ने कहा है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में वास्तविक समानता की शुरुआत कानून तक सभी नागरिकों की समान पहुंच से होती है।
- sakshi choudhary
- 25 Jun, 2026
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) Surya Kant ने कहा है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में वास्तविक समानता की शुरुआत कानून तक सभी नागरिकों की समान पहुंच से होती है। रूस में आयोजित 14वें सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंच को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कानून तक पहुंच केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका परिणाम लोगों को वास्तविक अधिकार और न्याय दिलाने के रूप में सामने आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल कानूनी घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि समाज के हर वर्ग को न्यायिक व्यवस्था का समान लाभ मिले।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने संबोधन में कहा कि कानून के समक्ष समानता की अवधारणा केवल आधुनिक लोकतंत्रों तक सीमित नहीं है। उन्होंने व्यक्तिगत दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि समानता के सिद्धांत की जड़ें भारतीय उपमहाद्वीप के प्राचीन ग्रंथ कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी देखी जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान ने नागरिकों को कानून के समक्ष समानता, गरिमापूर्ण जीवन और समान न्याय जैसे मौलिक अधिकार प्रदान किए हैं। हालांकि, इन अधिकारों को देश के दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचाना, जहां आर्थिक, सामाजिक और भाषाई चुनौतियां मौजूद हैं, एक बड़ी जिम्मेदारी रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने समय-समय पर संविधान की व्यापक व्याख्या कर इन बाधाओं को कम करने का प्रयास किया है।
अपने संबोधन में CJI ने यह भी कहा कि समान न्याय और समान कानून केवल संवैधानिक शब्द नहीं हैं, बल्कि किसी भी न्यायिक व्यवस्था की बुनियादी शर्तें हैं। उन्होंने वैश्विक स्तर पर विकासशील देशों की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक दक्षिण और पूर्व के कई देश आज भी अपनी संस्थाओं को मजबूत करने, उपनिवेशवाद के प्रभावों से उबरने और गरीबी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे देशों पर अक्सर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक दबाव और जांच होती है, जबकि शक्तिशाली देशों के अनुपालन रिकॉर्ड भी हमेशा आदर्श नहीं होते। उन्होंने कहा कि न्याय तक पहुंच को तकनीकी सुविधा नहीं बल्कि शासन के एक गैर-भेदभावपूर्ण और मूलभूत सिद्धांत के रूप में देखा जाना चाहिए, तभी वास्तविक समानता और न्याय स्थापित हो सकेगा।