Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● UP Election 2027: चिराग पासवान का बड़ा दांव, यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान ● ग्रेटर नोएडा: एमसी गोपीचंद इंटर कॉलेज में हॉलिडे होमवर्क प्रदर्शनी, 100 से अधिक मॉडल और चार्ट ने जीता सभी का दिल ● जंतर-मंतर पर बवाल! अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकी गई, सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती ● NEET 2026 Success Story: पेपर लीक के बाद भी नहीं हारे नोएडा के छात्र, मेहनत और अनुशासन से हासिल की शानदार रैंक ● Noida News: फीफा वर्ल्ड कप के रंग में रंगा नोएडा, स्कूलों और फुटबॉल अकादमियों में दिखा जबरदस्त फुटबॉल क्रेज ● UP News: ईडी की जांच में बड़ा खुलासा, विदेशी फंडिंग से चलता रहा घुसपैठ सिंडिकेट, बिना KYC खुले बैंक खाते ● ग्रेटर नोएडा में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को मिली रफ्तार, ईकोटेक-3 में हुआ पौधरोपण ● रोहित शर्मा के भविष्य पर सस्पेंस, BCCI की 2027 विश्व कप रणनीति में बड़े बदलाव के संकेत ● E20 पेट्रोल: नई कार खरीदते समय डिलीवरी नहीं, मैन्युफैक्चरिंग डेट क्यों है सबसे जरूरी? जानिए पूरा मामला ● UP Politics: सीट बंटवारे पर सपा-कांग्रेस में बढ़ी तल्खी, विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की राह हुई मुश्किल

भारत की पहली Hydrogen Train तैयार! कैसे चलती है, कितना होगा किराया? जानिए पूरी जानकारी

भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन अब हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दिखा दी है, जिसे भारतीय रेलवे के हरित और आधुनिक भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
top-news

भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन अब हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दिखा दी है, जिसे भारतीय रेलवे के हरित और आधुनिक भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या बिजली से नहीं, बल्कि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न ऊर्जा पर चलती है। फ्यूल सेल के भीतर दोनों गैसों के संयोजन से बिजली तैयार होती है, जिससे ट्रेन के मोटर संचालित होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड या जहरीला धुआं नहीं निकलता, बल्कि केवल जलवाष्प (वॉटर वेपर) उत्सर्जित होती है। यही वजह है कि हाइड्रोजन ट्रेन को पर्यावरण के अनुकूल और भविष्य की परिवहन तकनीक माना जा रहा है। भारतीय रेलवे का मानना है कि यह तकनीक देश में प्रदूषण कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


इस नई हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआती अधिकतम रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। हालांकि रेलवे की योजना भविष्य में इसकी गति बढ़ाकर 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक करने की है। ट्रेन में 10 ब्रॉड गेज कोच लगाए गए हैं, जिनमें लगभग 2500 यात्री एक साथ सफर कर सकेंगे। सबसे खास बात यह है कि आम यात्रियों को ध्यान में रखते हुए इसका न्यूनतम किराया 5 रुपये और अधिकतम 25 रुपये प्रस्तावित किया गया है। कम किराए के साथ आधुनिक तकनीक का यह मेल यात्रियों को किफायती, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा का अनुभव देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस परियोजना का संचालन सफल रहता है तो यह भारत में रेल परिवहन के नए युग की शुरुआत साबित हो सकती है।


भारतीय रेलवे लंबे समय से कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली विकसित करने पर काम कर रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद रेलवे देश के अन्य महत्वपूर्ण रेलमार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन शुरू करने की योजना बना सकता है। इससे न केवल डीजल पर निर्भरता घटेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन तकनीक भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की पहचान बन सकती है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में और मजबूत स्थिति हासिल करेगा जो स्वच्छ और टिकाऊ रेल परिवहन तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *