Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● ग्रेनो में अवैध डंपिंग पर प्राधिकरण सख्त, एम्स गोल्ड होम पर 40,400 रुपये का जुर्माना ● पांच विद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच होगा जूनियर चैंपियनशिप स्पोर्ट्स कार्निवल 2026 ● जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलेगा, नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट रखने को योगी कैबिनेट की मंजूरी ● ग्रेटर नोएडा से KGP तक बनेगी सीधी कनेक्टिविटी, 105 मीटर चौड़ी सड़क का होगा विस्तार ● वॉलीबॉल चैंपियंस लीग: अयोध्या गर्जन और नम्मा बेंगलुरु स्मैशर्स की शानदार जीत ● क्लासरूम से समुदाय तक बच्चों की सुरक्षा पर शारदा स्कूल ऑफ लॉ ने चलाया जागरूकता अभियान ● एम.एम.एच. कॉलेज में वन्यजीव सप्ताह का समापन, पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता में छात्रों ने दिखाई रचनात्मकता ● गौतमबुद्ध नगर पुलिस में बड़ा फेरबदल, अभय कुमार मिश्र बने ADCP ग्रेटर नोएडा ● जेवर एयरपोर्ट पर यात्रियों का हंगामा, लखनऊ जाने वाली फ्लाइट करीब तीन घंटे लेट ● दिल्ली-NCR में बदलेगा मौसम, 9 अक्तूबर को बारिश और तेज हवाओं का अनुमान

भारत की पहली Hydrogen Train तैयार! कैसे चलती है, कितना होगा किराया? जानिए पूरी जानकारी

भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन अब हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दिखा दी है, जिसे भारतीय रेलवे के हरित और आधुनिक भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
top-news

भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन अब हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दिखा दी है, जिसे भारतीय रेलवे के हरित और आधुनिक भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या बिजली से नहीं, बल्कि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न ऊर्जा पर चलती है। फ्यूल सेल के भीतर दोनों गैसों के संयोजन से बिजली तैयार होती है, जिससे ट्रेन के मोटर संचालित होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड या जहरीला धुआं नहीं निकलता, बल्कि केवल जलवाष्प (वॉटर वेपर) उत्सर्जित होती है। यही वजह है कि हाइड्रोजन ट्रेन को पर्यावरण के अनुकूल और भविष्य की परिवहन तकनीक माना जा रहा है। भारतीय रेलवे का मानना है कि यह तकनीक देश में प्रदूषण कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


इस नई हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआती अधिकतम रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। हालांकि रेलवे की योजना भविष्य में इसकी गति बढ़ाकर 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक करने की है। ट्रेन में 10 ब्रॉड गेज कोच लगाए गए हैं, जिनमें लगभग 2500 यात्री एक साथ सफर कर सकेंगे। सबसे खास बात यह है कि आम यात्रियों को ध्यान में रखते हुए इसका न्यूनतम किराया 5 रुपये और अधिकतम 25 रुपये प्रस्तावित किया गया है। कम किराए के साथ आधुनिक तकनीक का यह मेल यात्रियों को किफायती, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा का अनुभव देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस परियोजना का संचालन सफल रहता है तो यह भारत में रेल परिवहन के नए युग की शुरुआत साबित हो सकती है।


भारतीय रेलवे लंबे समय से कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली विकसित करने पर काम कर रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद रेलवे देश के अन्य महत्वपूर्ण रेलमार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन शुरू करने की योजना बना सकता है। इससे न केवल डीजल पर निर्भरता घटेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन तकनीक भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की पहचान बन सकती है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में और मजबूत स्थिति हासिल करेगा जो स्वच्छ और टिकाऊ रेल परिवहन तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।