Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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बिहार SIR: नितिन नवीन के पिता के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले का नाम वोटर लिस्ट से गायब

बिहार में Special Intensive Revision (SIR) के बाद मतदाता सूची से नाम हटने का एक और मामला सामने आया है।
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बिहार में Special Intensive Revision (SIR) के बाद मतदाता सूची से नाम हटने का एक और मामला सामने आया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पिता और दिवंगत विधायक नवीन किशोर सिन्हा के खिलाफ 1995 में चुनाव लड़ने वाले रामजी प्रसाद राय का नाम मौजूदा मतदाता सूची में नहीं है। रामजी प्रसाद राय उस समय बहुजन समाज पार्टी (BSP) के प्रत्याशी थे। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पटना पश्चिम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और उन्हें 866 वोट मिले थे। रामजी राय का दावा है कि SIR से पहले तक उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज था और वह लगातार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते रहे हैं।


रामजी प्रसाद राय के मुताबिक, नाम हटने के बाद उन्होंने BLO और SDO कार्यालय में शिकायत की, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि उनके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और पुराना वोटर आईडी जैसे दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिस बूथ पर पहले उनका नाम दर्ज था, उसी बूथ पर उनकी पत्नी का नाम अभी मौजूद है। रिपोर्ट के अनुसार, रामजी राय 2005 में भी दानापुर से BSP के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, 1995 के चुनाव रिकॉर्ड में प्रत्याशी का नाम 'रामजी प्रसाद' दर्ज है, जबकि उनके मौजूदा दस्तावेजों में 'रामजी प्रसाद राय' नाम है। इसलिए इन दोनों रिकॉर्डों के एक ही व्यक्ति से संबंधित होने की पुष्टि निर्वाचन प्रक्रिया के स्तर पर किया जाना बाकी है।

बिहार में SIR की प्रक्रिया 24 जून 2025 से शुरू हुई थी और 30 सितंबर 2025 को अंतिम मतदाता सूची जारी की गई। निर्वाचन आयोग के अनुसार, 24 जून को राज्य में करीब 7.89 करोड़ मतदाता थे। ड्राफ्ट सूची में करीब 65 लाख नाम शामिल नहीं किए गए, जबकि दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद 21.53 लाख पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े गए और करीब 3.66 लाख नाम हटाए गए। अंतिम सूची में करीब 7.42 करोड़ मतदाता दर्ज हुए। आयोग ने पात्र लोगों के लिए नाम जोड़ने और अपील की व्यवस्था भी बताई थी। रामजी राय का मामला इसी प्रक्रिया में नाम हटने की शिकायत के रूप में सामने आया है; उनके नाम हटाए जाने का वास्तविक कारण और जिम्मेदारी किसकी है, यह संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की जांच से स्पष्ट होगा।