Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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राहुल गांधी की शिक्षा मुहिम! क्यों चुने गए देश के चार सबसे बड़े एजुकेशन हब?

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर देशव्यापी अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य मुद्दा नीट पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं हैं।
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर देशव्यापी अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य मुद्दा नीट पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं हैं। युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए राहुल गांधी ने कोटा, प्रयागराज, पटना और दिल्ली जैसे चार बड़े शिक्षा केंद्रों को चुना है। ये शहर केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि लाखों छात्रों के सपनों, प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्र जीवन के प्रमुख केंद्र भी माने जाते हैं। कांग्रेस का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों का सबसे ज्यादा असर इन्हीं छात्रों पर पड़ता है, इसलिए अभियान की शुरुआत इन शहरों से की गई है।


राजस्थान का कोटा देश की कोचिंग राजधानी के रूप में जाना जाता है। हर साल करीब दो से ढाई लाख छात्र यहां IIT-JEE और NEET जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पहुंचते हैं। वहीं प्रयागराज को ‘ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट’ और ‘IAS-PCS की नर्सरी’ कहा जाता है। यहां स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ हजारों कोचिंग संस्थान लाखों युवाओं को सिविल सेवा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं। दूसरी ओर, पटना बिहार की प्राचीन शैक्षिक विरासत और आधुनिक कोचिंग संस्कृति का संगम है। नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्व प्रसिद्ध शिक्षा केंद्रों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज पटना पूर्वी भारत का प्रमुख प्रतियोगी परीक्षा केंद्र बन चुका है, जहां बिहार सहित कई राज्यों के छात्र तैयारी करने आते हैं।


अभियान का अंतिम पड़ाव दिल्ली होगा, जिसे देश की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की राजधानी माना जाता है। यहां स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय, JNU, IIT दिल्ली, AIIMS और जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसे संस्थान देशभर के छात्रों को आकर्षित करते हैं। साथ ही मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर UPSC अभ्यर्थियों के सबसे बड़े केंद्र माने जाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी ने इन चार शहरों का चयन इसलिए किया है क्योंकि ये देश के करोड़ों छात्रों की आकांक्षाओं, संघर्षों और भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर युवाओं को सीधे जोड़ने के लिए ये शहर सबसे प्रभावी मंच साबित हो सकते हैं।

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