ग्रेटर नोएडा के दनकौर में बनेगा जिले का तीसरा CM कंपोजिट स्कूल, 30 करोड़ की लागत से मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
- sakshi choudhary
- 03 Aug, 2026
ग्रेटर नोएडा के दनकौर क्षेत्र के अमरपुर गांव में जिले का तीसरा सीएम मॉडल कंपोजिट स्कूल बनाया जाएगा। इसके लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से करीब छह एकड़ जमीन शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी। लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस अत्याधुनिक स्कूल में प्री-नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक पढ़ाई की सुविधा होगी। स्कूल बनने से दनकौर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हजारों विद्यार्थियों को घर के नजदीक बेहतर और आधुनिक शिक्षा मिल सकेगी। लंबे समय से क्षेत्र में एक बड़े सरकारी स्कूल की मांग की जा रही थी। बढ़ती आबादी और तेजी से हो रहे औद्योगिक व आवासीय विकास के बीच कई छात्रों को उच्च कक्षाओं की पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ता है। नए स्कूल के निर्माण से विद्यार्थियों और अभिभावकों की समय व आर्थिक परेशानियां कम होने की उम्मीद है।
सीएम कंपोजिट स्कूल में विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ कई अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। स्कूल परिसर में करीब 30 स्मार्ट क्लास, आधुनिक विज्ञान, रोबोटिक्स और कंप्यूटर लैब, डिजिटल लाइब्रेरी, खेल मैदान और मिनी स्टेडियम जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अलावा ऑडिटोरियम, कला एवं संगीत कक्ष, सुरक्षित पेयजल, सीसीटीवी निगरानी और दिव्यांग अनुकूल सुविधाओं का भी प्रावधान रहेगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ तकनीकी और व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने के लिए कौशल विकास केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल शैक्षणिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य के रोजगार और स्वरोजगार के लिए जरूरी हुनर से भी लैस करना है। एक ही परिसर में प्री-नर्सरी से 12वीं तक की पढ़ाई होने से विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए बार-बार स्कूल बदलने या दूर जाने की जरूरत कम होगी।
गौतमबुद्धनगर में मुख्यमंत्री कंपोजिट स्कूल योजना के तहत पहले से ही दो स्कूलों का निर्माण चल रहा है। इनमें दादरी के प्यावली और जेवर के रबूपुरा सेक्टर-34 में आधुनिक स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। अब दनकौर में तीसरे स्कूल के लिए जमीन उपलब्ध होने के बाद जिले के शिक्षा ढांचे को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के मुताबिक भूमि उपलब्ध होने के बाद निर्माण से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इन स्कूलों के जरिए ग्रामीण और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। साथ ही, प्री-नर्सरी से 12वीं तक एक ही परिसर में शिक्षा की सुविधा मिलने से ड्रॉपआउट दर में कमी लाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। स्कूल शुरू होने के बाद क्षेत्र के हजारों बच्चों को बेहतर शिक्षा और आधुनिक संसाधनों का लाभ मिल सकेगा।