Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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अविमुक्तेश्वरानंद ने ब्रजेश पाठक के 101 बटुक पूजन पर साधा निशाना, माघ मेले घटना का पाप नहीं धुल सकता

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक द्वारा 101 बटुकों का पूजन करने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री ने बटुकों को अंगवस्त्रम और तिलक लगाकर सम्मानित किया, लेकिन इससे प्रयागराज में माघ मेले में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना का पाप नहीं धुल सकता। शंकराचार्य ने इसे राजनीति करार देते हुए कहा कि वास्तविक पीड़ित बटुक की चोटी खींची गई थी, जबकि प्रशासन ने केवल अपने पसंद के बटुकों को बुलाकर चंदन और पुष्पवर्षा की। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक द्वारा 101 बटुकों का पूजन करने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री ने बटुकों को अंगवस्त्रम और तिलक लगाकर सम्मानित किया, लेकिन इससे प्रयागराज में माघ मेले में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना का पाप नहीं धुल सकता। शंकराचार्य ने इसे राजनीति करार देते हुए कहा कि वास्तविक पीड़ित बटुक की चोटी खींची गई थी, जबकि प्रशासन ने केवल अपने पसंद के बटुकों को बुलाकर चंदन और पुष्पवर्षा की। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक द्वारा 101 बटुकों का पूजन करने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री ने बटुकों को अंगवस्त्रम और तिलक लगाकर सम्मानित किया, लेकिन इससे प्रयागराज में माघ मेले में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना का पाप नहीं धुल सकता। शंकराचार्य ने इसे राजनीति करार देते हुए कहा कि वास्तविक पीड़ित बटुक की चोटी खींची गई थी, जबकि प्रशासन ने केवल अपने पसंद के बटुकों को बुलाकर चंदन और पुष्पवर्षा की।
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उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक द्वारा 101 बटुकों का पूजन करने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री ने बटुकों को अंगवस्त्रम और तिलक लगाकर सम्मानित किया, लेकिन इससे प्रयागराज में माघ मेले में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना का पाप नहीं धुल सकता। शंकराचार्य ने इसे राजनीति करार देते हुए कहा कि वास्तविक पीड़ित बटुक की चोटी खींची गई थी, जबकि प्रशासन ने केवल अपने पसंद के बटुकों को बुलाकर चंदन और पुष्पवर्षा की।


अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि यह पूजा कोई वास्तविक कार्रवाई नहीं है बल्कि केवल राजनीतिक शोभा है। उन्होंने 11 मार्च को लखनऊ जाकर 20 दिन के अल्टीमेटम के बाद निष्कर्ष घोषित करने की बात कही। साथ ही गोरक्षा को लेकर साधु-संतों और सनातनियों के साथ प्रदेश सरकार की स्पष्ट नीति की मांग की। उन्होंने कहा कि भाजपा के 100 से अधिक कार्यकर्ता और पूर्व विधायक भी उनकी शरण में आ रहे हैं क्योंकि उन्हें सरकार की मंशा पर भरोसा नहीं है।


शंकराचार्य ने यूपी सरकार पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि न्याय की उम्मीद भाजपा सरकार में नहीं है। उन्होंने राजनीतिक हथकंडों से सनातन परंपरा और वास्तविक पीड़ितों की भावनाओं का ध्यान न देने की निंदा की। उनका कहना है कि केवल बटुकों पर पुष्पवर्षा करने या तिलक लगाने से घटना का पाप नहीं मिटाया जा सकता।