कांवड़ यात्रा मार्ग पर चिकन-मटन दुकानें बंद कराने के खिलाफ याचिका खारिज, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
- sakshi choudhary
- 14 Aug, 2026
सावन माह में अमरोहा में चिकन और मटन की दुकानों को बंद कराने के लिए जारी नोटिस के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए याची की मंशा पर तल्ख टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि यह याचिका ‘पब्लिक इंटरेस्ट’ नहीं, बल्कि ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट’ में दाखिल की गई है। याचिका अधिवक्ता नासिर फारूक की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें सावन के दौरान अमरोहा में चिकन और मटन की दुकानों को बंद कराने के लिए जारी नोटिस की वैधानिकता को चुनौती दी गई थी। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने याचिका का विरोध किया।
सुनवाई के दौरान याची की ओर से अधिवक्ता मुस्तकीम अहमद ने अदालत को बताया कि अमरोहा में कांवड़ यात्रा मार्ग से अलग स्थित चिकन की दुकानों को भी पुलिस की ओर से बिना तारीख वाले नोटिस जारी कर बंद कराया गया है। याचिका में दावा किया गया कि नोटिस में केवल सावन के चार सोमवार को दुकानें बंद रखने का उल्लेख था, लेकिन प्रशासन की ओर से पूरे सावन माह में चिकन और मटन की दुकानें नहीं खुलने दी जा रही हैं। यह भी आरोप लगाया गया कि कांवड़ यात्रा मार्ग के अलावा गलियों और अन्य स्थानों पर स्थित दुकानों को भी बंद कराया गया। याची ने कहा कि कार्रवाई से बड़ी संख्या में दुकानदारों और उनसे जुड़े लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
याचिका में हाईकोर्ट से हस्तक्षेप करते हुए कथित अनडेटेड नोटिस रद्द करने की मांग की गई थी। याची का तर्क था कि दुकानों के लंबे समय तक बंद रहने से सैकड़ों लोगों के सामने रोजगार और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, मामले की सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। अदालत की ‘पब्लिक इंटरेस्ट’ बनाम ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट’ वाली टिप्पणी इस मामले में खास तौर पर चर्चा में है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अमरोहा में सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान मांस की दुकानों को बंद कराने से जुड़े प्रशासनिक आदेश और उनकी वैधानिकता को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है।
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