राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद सख्ती: फेस रीडिंग से हाजिरी, कैमरों की निगरानी; कर्मचारियों पर कार्रवाई तेज
- sakshi choudhary
- 20 Aug, 2026
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद मंदिर परिसर और उससे जुड़े संस्थानों में कर्मचारियों की निगरानी व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। अब कर्मचारियों की एंट्री से लेकर एग्जिट तक फेस रीडिंग के जरिए उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही रजिस्टर में आने-जाने का समय भी दर्ज किया जा रहा है। राम मंदिर परिसर के अलावा रामघाट कार्यशाला, तीर्थ यात्री सेवा केंद्र, तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र और रामनिवास में भी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के जरिए कर्मचारियों की मौजूदगी और गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। लगातार देरी से पहुंचने या ड्यूटी से गायब रहने वाले कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की जा रही है।
राम मंदिर और उससे जुड़े परिसरों में अलग-अलग व्यवस्थाओं के लिए करीब 1,000 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के करीब 300 कर्मचारी शामिल हैं, जबकि एसआईएस के 300 से अधिक सुरक्षा कर्मी भी तैनात हैं। इसके अलावा सेना के 35 से ज्यादा सेवानिवृत्त जवान भी सेवाएं दे रहे हैं। दूसरी ओर, चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख लोगों की सक्रियता भी चर्चा में है। पूर्व महासचिव चंपत राय 25 जुलाई से अयोध्या के मठ-मंदिरों में संतों से मुलाकात कर रहे हैं। पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भी सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आए और बुधवार को रामकोट की परिक्रमा की। इसी बीच गोपाल राव करीब एक महीने बाद अयोध्या लौटे, रामलला के दर्शन किए और चंपत राय से मुलाकात की। इस घटनाक्रम ने मंदिर व्यवस्था को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
उधर, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपियों की रिमांड को लेकर 25 अगस्त को अगली सुनवाई होगी। बुधवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा ने विवेचक आशुतोष तिवारी को संपूर्ण केस डायरी के साथ अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया। जेल में बंद आरोपियों ने सात अगस्त को रिमांड पर सवाल उठाते हुए प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। बचाव पक्ष का कहना है कि आरोपियों पर लगाए गए अपराधों में अधिकतम सजा सात साल है और रिमांड में उचित धाराओं का पालन किया जाना चाहिए। इस पूरे मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ अब मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता, कर्मचारियों की जवाबदेही और चढ़ावे की सुरक्षा को लेकर नए नियमों पर खास नजर बनी हुई है।
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