Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने के बावजूद अधिकारियों की वापसी में देरी, क्या भ्रष्टाचार के संकेत हैं?

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ग्रेटर नोएडा। कपिल चौधरी

ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण में प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की तीन साल की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद उन्हें उनके मूल विभागों में वापस नहीं भेजा गया है। इस प्रकरण ने न केवल प्रशासनिक प्रणाली में कमजोरी को उजागर किया है, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के संदेह को भी हवा दी है। जो अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर प्रबंधक और सहायक प्रबंधक के पद पर आए थे वह ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में वरिष्ठ प्रबंधक बन गए हैं और उनके भ्रष्टाचार के चर्चे खुलेआम और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में मर्ज होने के लिए मोटी रकम देने के लिए भी तैयार है। सभी का तीन साल का समय सितम्बर 2024 में समाप्त हो गया है। जिसमे प्रबंधक चरण सिंह, प्रबंधक विजय कुमार, प्रबंधक राजेश निम, सहायक प्रबंधक हरिंदर सिंह, सहायक प्रबंधक राम किशन, सहायक प्रबंधक (इलेक्ट्रिकल) मनोज कुमार, सहायक प्रबंधक राजीव कुमार आदि।

प्रबंधक और वरिष्ठ प्रबंधकों की प्राधिकरण में भरपूर संख्या

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में सहायक प्रबंधकों की तो कमी है लेकिन प्रबंधक और वरिष्ठ प्रबंधकों की कोई कमी नहीं है प्राधिकरण में भरपूर संख्या में अपने प्रबंधक और वरिष्ठ प्रबंधक है दूसरे विभागों से आए हुए अधिकारियों को उनके मूल विभाग भेज देना चाहिए। क्योंकि यह लोग सिर्फ 3 साल के लिए प्राधिकरण में आते हैं और भ्रष्टाचार को अंजाम देकर के निकल जाते हैं। बाहर के प्रबंधकों प्राधिकरण में चार्ज देने से प्राधिकरण के अपने प्रबंधकों में रोष है।

निर्माण और विकास परियोजनाओं में अनियमितताएँ

इन अधिकारियों द्वारा चलाए जा रहे प्रोजेक्ट्स में भी संभावित भ्रष्टाचार के संकेत हैं। कई परियोजनाओं में गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे, ठेकों में अनियमितताएं और तय समयसीमा में काम पूरा न होने के मामले सामने आ चुके हैं। इन अधिकारियों की अनियमितताओं की जांच हो। इस मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कोई भी स्पष्ट स्पष्टीकरण या आधिकारिक बयान प्राधिकरण द्वारा नहीं दिया गया है। अधिकारियों को वापस न भेजने के पीछे की वजहों को छुपाया जा रहा है, जो कि स्पष्ट रूप से प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। अगर कोई भ्रष्टाचार न होता, तो प्राधिकरण अपनी नीतियों को पारदर्शी तरीके से प्रस्तुत करता। लेकिन तथ्य यह है कि इस मामले में कोई खुलासा नहीं हो रहा, यह संदेह पैदा करता है कि प्राधिकरण में उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार व्याप्त है।

जब अधिकारी लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहते हैं और उनके कार्यकाल की अवधि समाप्त होने के बावजूद उन्हें वापस नहीं भेजा जाता, तो इससे उनका मनोबल बढ़ता है। यह स्थिति भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है, क्योंकि वे जानते हैं कि उनके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसी स्थिती भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की संभावनाओं को भी जन्म देती है। पारदर्शिता की कमी, नीतिगत अव्यवस्था और बाहरी हस्तक्षेप से यह स्पष्ट होता है कि प्राधिकरण में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें हो सकती हैं। अगर इस स्थिति को जल्द नहीं सुधारा गया, तो यह न केवल प्राधिकरण की छवि को प्रभावित करेगा, बल्कि भविष्य में गंभीर जांच और प्रशासनिक बदलाव की आवश्यकता भी उत्पन्न कर सकता है।