Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● ग्रेटर नोएडा की दो सोसायटियों की बिजली कटने का खतरा, 1700 परिवारों की बढ़ी चिंता ● नोएडा में मिशन शक्ति 6.0 के तहत महिला सशक्तिकरण रैली, 500 छात्राओं ने लिया हिस्सा ● ओवैसी का सरकार पर हमला, CEC की नियुक्ति से जुड़ा कानून रद्द करने की मांग; SIR पर भी उठाए सवाल ● UP Weather Update: यूपी में फिर बदलेगा मौसम! पश्चिमी जिलों में आंधी-बारिश और ओले, 15 अक्टूबर से दोबारा सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ ● नेपाल में 45 दिन बाद फिर कुदरत का कहर! बूढ़ी गंडकी नदी में भीषण बाढ़, 40 घर बहे, 5 लोग लापता ● नोएडा: बहन को बच्चा देने के लिए चुराई 3 दिन की नवजात, 8 घंटे में पुलिस ने किया रेस्क्यू; महिला और भाई गिरफ्तार ● दिल्ली मेट्रो बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, गृह सचिव समेत तीन अधिकारियों को नोटिस ● यूपी दरोगा भर्ती 2025: हाईकोर्ट से अभ्यर्थियों को झटका, 4543 पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ ● यूपी के भाजपा विधायक पर गंभीर आरोप, युवकों को उल्टा लटकाकर पीटने और करंट लगाने का दावा ● ग्रेटर नोएडा में सेफ सिटी परियोजना में देरी, 2700 कैमरे लगाने का इंतजार बढ़ा

भारत के सर्वोच्च न्यायालय की 75वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री मोदी ने किया राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन, न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने पर दिया जोर

top-news

नोएडा। दिव्यांशु ठाकुर

भारत के सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना के 75 वर्ष और संविधान लागू होने के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने टिकट और सिक्के का अनावरण करते हुए कहा कि न्याय में देरी को खत्म करने के लिए पिछले एक दशक में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अपराध के मामलों में जितनी तेजी से न्याय मिलेगा, समाज में सुरक्षा का उतना ही भरोसा बढ़ेगा। कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि जिला न्यायालय न्यायपालिका का दर्पण है, जो आम जनता के मन में न्यायपालिका की छवि को परिभाषित करता है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने न्यायपालिका को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, खासकर जिला और सत्र न्यायालयों में। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता एक संपन्न लोकतंत्र का मूलभूत आधार है, और इसे संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है।