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हरियाली तीज 2024: सौभाग्य और संतान सुख की प्राप्ति के लिए विशेष पर्व

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नोएडा। दिव्यांशु ठाकुर

हरियाली तीज हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा उनके सौभाग्य और संतान सुख की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। हर साल यह पर्व सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष हरियाली तीज की तृतीया तिथि 6 अगस्त को रात 7:52 मिनट से शुरू होकर 7 अगस्त को रात 10:05 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, इस वर्ष हरियाली तीज 7 अगस्त को मनाई जा रही है।

इस दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव, तीज माता के स्वरूप में देवी पार्वती, नंदी, कार्तिकेय, और श्रीगणेश जी की पूजा करती हैं। हरियाली तीज के दिन विशेष रूप से हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह हरियाली और सौभाग्य का प्रतीक है।

पूजा के लिए महिलाएं स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और मिट्टी या बालू से मां पार्वती और शिवलिंग का निर्माण कर उनकी पूजा करती हैं। अगर यह संभव न हो तो शिव परिवार की तस्वीर रखकर पूजा की जाती है। पूजा की थाली में सुहाग की सभी सामग्री सजाकर माता पार्वती को अर्पित की जाती है। नैवेद्य में भगवान को घेवर, खीर, पूरी, हलुआ, और मालपुए का भोग लगाया जाता है। पूजा के समय मंत्रों का जाप और व्रत की विधि का पालन पूरी निष्ठा से किया जाता है। तत्पश्चात तीज माता की कथा सुनी या पढ़ी जाती है।

इस पर्व पर विशेष रूप से बांस, तुलसी, और पीपल के पौधों की पूजा की जाती है। पौधों को सुंदर तरीके से सजाकर दीपक और अगरबत्ती लगाकर पूजा की जाती है। हरियाली तीज के अवसर पर महिलाएं श्रृंगार कर एकत्र होती हैं, झूला झूलती हैं और सावन के मधुर गीत गाती हैं, जिसे शुभ माना जाता है।

हरियाली तीज के दिन किसी भी सुहागन महिला को सुहाग का सामान दान करने और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और रिश्ते में मधुरता आती है।

इस दिन झगड़े और विवाद से बचना चाहिए। परिवार में शांति और सहयोग बनाए रखना महत्वपूर्ण है। काले और सफेद रंग के वस्त्र और आभूषण पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि यह अशुभ माना जाता है। सकारात्मक सोच और अच्छे विचार बनाए रखना आवश्यक है, और प्रकृति को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। पेड़-पौधों को हानि पहुंचाने से बचना चाहिए, क्योंकि हरियाली तीज का संबंध प्रकृति और सुखद वैवाहिक जीवन से है।