Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● यूपी के भाजपा विधायक पर गंभीर आरोप, युवकों को उल्टा लटकाकर पीटने और करंट लगाने का दावा ● ग्रेटर नोएडा में सेफ सिटी परियोजना में देरी, 2700 कैमरे लगाने का इंतजार बढ़ा ● कोहरे में हादसे रोकने की तैयारी, ग्रेनो वेस्ट-130 मीटर रोड पर लग रहे रोड ब्लिंकर्स ● ग्रेनो में अवैध डंपिंग पर प्राधिकरण सख्त, एम्स गोल्ड होम पर 40,400 रुपये का जुर्माना ● पांच विद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच होगा जूनियर चैंपियनशिप स्पोर्ट्स कार्निवल 2026 ● जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलेगा, नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट रखने को योगी कैबिनेट की मंजूरी ● ग्रेटर नोएडा से KGP तक बनेगी सीधी कनेक्टिविटी, 105 मीटर चौड़ी सड़क का होगा विस्तार ● वॉलीबॉल चैंपियंस लीग: अयोध्या गर्जन और नम्मा बेंगलुरु स्मैशर्स की शानदार जीत ● क्लासरूम से समुदाय तक बच्चों की सुरक्षा पर शारदा स्कूल ऑफ लॉ ने चलाया जागरूकता अभियान ● एम.एम.एच. कॉलेज में वन्यजीव सप्ताह का समापन, पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता में छात्रों ने दिखाई रचनात्मकता

बुलडोजर को पहचानिए वो बढ़ रहा है थोड़ा थोड़ा रोज आपकी तरफ भी, जरूर पढ़े।

top-news

अगर आपको लगता है कि कानपुर में हुए वीभत्स अपराध के जिम्मेदार सिर्फ अधिकारी हैं तो या आप बहुत मासूम हैं या आपकी दृष्टि बहुत सीमित है। बुलडोजर सबसे पहले उस गरीब के घर पर नहीं चला है,पहले संविधान पर चला था जहां दिए गए मूल अधिकार को रौंदा था बुलडोजर ने और आप खुश थे।

उसके बाद बुलडोजर चला कानून की प्रक्रिया पर जहां न अपील न वकील न दलील और फैसला होने लगा। आप खुश। फिर बुलडोजर ने रौंदा अदालत के कार्य क्षेत्र को और अधिकारी अदालत बन गए, फैसला करने लगे। आपको मजा आया। आप कहते हैं अपराधियों के घर पर बुलडोजर का समर्थन था पर अपराधी का फैसला कौन करेगा?

अपराधी का फैसला अदालत में होगा या आप करेंगे? टीवी चैनल करेंगे या ट्रोल करेंगे? और अगर अपराधी हो भी तो उसके घर वालों का क्या कसूर? उसे पकड़िए घर क्यों गिराएंगे। घर अवैध बना है तो अकेला उसी का बना है? बुलडोजर न्याय फासीवाद का चलता फिरता रूप है।फासीवादी सोच ने मारा है मां बेटी को।

उस सोच ने जलाया है उनको जिसने पहले लोगों की लोकतांत्रिक सोच को जलाया। अदालत के बाहर दोष निर्धारण ने शक्ति अधिकारियों/पुलिस के हाथ ट्रांसफर कर दी। आप खुश थे। प्रचार तंत्र दोषी घोषित करेगा, उसी तंत्र से ब्रेनवाश हुए लोग अपराधी को तुरंत सजा चाहेंगे और उसी तंत्र के मालिक सजा देंगे।वाह!

एक बुलडोजर लोकतंत्र पर भी चल रहा है जो आपको दिखाई नहीं दे रहा क्योंकि दिखाई तो आपको वो बुलडोजर भी नहीं दिया जो दशकों से चुपके चुपके चल रहा था और लोगों को लोकतंत्र/संविधान का विरोधी बना रहा था। हर उस चीज का विरोधी बना रहा था जिस पर गर्व होना चाहिए था आपको। सत्य अहिंसा के सिद्धांत, विविधता, सह अस्तित्व, शांतिप्रियता जिसके लिए दुनिया में भारत का सम्मान है वो आपको कमजोरी बताए गए और आपने मान लिया। आपको प्रतिक्रियावादी और हिंसा का समर्थक बनाया गया, बन गए, वो कौन सा बुलडोजर था जो बुद्धि विवेक पर चलाया गया, कौन ड्राइवर था बुलडोजर का पता कीजिए।

आपको पता लगा कब आपको हिटलर अच्छा लगने लगा और गांधी बुरे लगने लगे? बुलडोजर दिमाग पर चला है पहले। इतने साल बाद वो पहुंचा कानपुर देहात। इस बुलडोजर को रोक दीजिए, बुलडोजर विध्वंस का प्रतीक है न्याय का नहीं। बुलडोजर चाहे जिसके घर पर चले मरती इंसानियत है। दूसरों की बरबादी पर खुश होना बंद कर दीजिए। मन के उस बुलडोजर को तोड़ डालिए जिसने आपको विध्वंस पर खुश होना, किसी के बेघर होने पर जश्न मनाना सिखाया है। आप ऐसे नहीं हैं, दुष्प्रचार और नफरत ने बना दिया ऐसा। अभी वक्त है, बुलडोजर को पहचानिए वो बढ़ रहा है थोड़ा थोड़ा रोज आपकी तरफ भी।