Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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शिवसेना (UBT) में टूट की अटकलें तेज, संजय राउत का बड़ा आरोप! सांसदों को दिए जा रहे 15 करोड़ रुपये

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) में संभावित टूट की चर्चाओं के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बड़ा दावा किया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राउत ने आरोप लगाया कि कुछ सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए 15-15 करोड़ रुपये की पेशकश की गई है।
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) में संभावित टूट की चर्चाओं के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बड़ा दावा किया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राउत ने आरोप लगाया कि कुछ सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए 15-15 करोड़ रुपये की पेशकश की गई है। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसी जानकारी है कि कई सांसदों को पैसे दिए गए और बाद में वे नांदेड़, पुणे समेत तीन अलग-अलग स्थानों से चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए रवाना हुए। राउत ने बताया कि पार्टी ने संसदीय दल की बैठक के लिए व्हिप जारी कर दिया है और इस पूरे मामले को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र भेजा गया है। गौर करने वाली बात यह रही कि शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से केवल तीन सांसद ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद दिखाई दिए, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला।


संजय राउत ने वर्ष 2022 में हुई शिवसेना की बड़ी टूट का जिक्र करते हुए चेतावनी दी कि यदि एक बार फिर पार्टी को तोड़ने की कोशिश की गई तो महाराष्ट्र की जनता और शिवसैनिक चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के लिए क्षेत्रीय दलों को निशाना बनाया जा रहा है। राउत ने तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) जैसी पार्टियों का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर चुने हुए प्रतिनिधियों को धनबल के जरिए तोड़ा जाएगा तो लोकतंत्र की मूल भावना पर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत से सांसद चुनाव जीतते हैं और जनता के विश्वास का सम्मान करना उनकी जिम्मेदारी है।


उधर, संभावित बागी सांसदों को सीधी चुनौती देते हुए संजय राउत ने कहा कि यदि कोई नेता पार्टी छोड़ना चाहता है तो पहले सांसद पद से इस्तीफा दे और फिर जनता के बीच जाकर नया जनादेश हासिल करे। वहीं सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि अभी तक किसी सांसद ने आधिकारिक तौर पर पार्टी छोड़ने की जानकारी नहीं दी है, लेकिन स्थिति को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजा गया है। फिलहाल किसी सांसद ने खुलकर बगावत की घोषणा नहीं की है, लेकिन संसदीय दल की बैठक और आने वाले दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम पर पूरे महाराष्ट्र की नजर टिकी हुई है।

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