Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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क्या रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा भारत? राजनाथ सिंह बोले....

भारत का रक्षा क्षेत्र पिछले एक दशक में तेजी से बदलता नजर आ रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वडोदरा में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए दावा किया कि वर्ष 2014 में जहां भारत का रक्षा निर्यात लगभग 1,000 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 39,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
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भारत का रक्षा क्षेत्र पिछले एक दशक में तेजी से बदलता नजर आ रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वडोदरा में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए दावा किया कि वर्ष 2014 में जहां भारत का रक्षा निर्यात लगभग 1,000 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 39,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि घरेलू रक्षा उत्पादन भी 46 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उनके अनुसार, यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान, मेक इन इंडिया, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में सुधार, तकनीक विकास कोष, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और रक्षा स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने जैसी सरकारी नीतियों का परिणाम है। राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले भारत अपनी अधिकांश रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी देशों पर निर्भर था, लेकिन अब देश स्वदेशी रक्षा निर्माण और वैश्विक निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल घरेलू उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना भी है। उन्होंने उद्योग जगत से ऐसे उत्पाद विकसित करने की अपील की जो भारतीय सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रतिस्पर्धी साबित हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत विदेशी कंपनियों के साथ तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त उद्यम (Joint Venture) और रणनीतिक साझेदारी का स्वागत करता है, लेकिन इन सहयोगों का लाभ भारत में विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और रोजगार सृजन के रूप में मिलना चाहिए। उनके अनुसार, स्वदेशी प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीक अपनाने से भारत की रक्षा क्षमता लगातार मजबूत हो रही है और देश आयातक से निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि मौजूदा उपलब्धियां केवल शुरुआत हैं और भारत को अभी लंबा सफर तय करना है। उन्होंने गुजरात के मजबूत औद्योगिक ढांचे, कुशल कार्यबल और उद्यमशीलता की सराहना करते हुए कहा कि राज्य भविष्य में रक्षा विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बन सकता है। रक्षा मंत्री के अनुसार, आने वाले वर्षों में चिप निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में निवेश भारत की रक्षा शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। उन्होंने उद्योगों से आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि मजबूत रक्षा उत्पादन न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक विश्वसनीय और प्रभावशाली शक्ति के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।